सीमा संवाददाता जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
01/08/2025
काठमाण्डौ,नेपाल – चूँकि मानव तस्करी नेपाल और भारत के बीच एक आम समस्या है, इसलिए इस पर नियंत्रण के लिए दोनों देशों के हितधारकों के बीच सहयोग आवश्यक है।
शुक्रवार को जिला पुलिस कार्यालय परसा, जाव्लाखेल ललितपुर जिला द्वारा आयोजित ‘मानव तस्करी नियंत्रण’ पर सीमा समन्वय बैठक में भाग लेने वाले दोनों देशों के हितधारकों ने इस आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
जिला समन्वय समिति परसा के अध्यक्ष निरंजन साह सोनार ने कहा कि मानव तस्करी को नियंत्रित करने के लिए कड़े कानून और दंड व्यवस्था की आवश्यकता है।
उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि जानबूझकर अपराध करने वालों के लिए सामान्य कानून और दंड कम हैं और इस समस्या के समाधान के लिए नेपाल और भारत के हितधारकों के बीच आपसी समन्वय और सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
परसा जिला के मुख्य जिला अधिकारी गणेश अर्याल ने कहा कि नेपाल और भारत में मानव तस्करी और हिंसा की प्रवृत्ति समान है।
उन्होंने कहा कि चूँकि सुरक्षा एजेंसियां और राज्य अकेले इस समस्या का समाधान नहीं कर सकते, इसलिए गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग की भी आवश्यकता है।
नारायणी अस्पताल, बीरगंज स्थित वन-स्टॉप क्राइसिस मैनेजमेंट सेंटर की प्रमुख अहेमा थापा ने बताया कि बीरगंज में तस्करी के शिकार और बचाए जाने वाले लोगों को आश्रय देने के लिए आश्रय गृहों की कमी के कारण समस्याएँ हैं।
जिला पुलिस कार्यालय, परसा के पुलिस अधीक्षक गौतम मिश्रा ने एक कार्य-पत्र प्रस्तुत करते हुए बताया कि पिछले छह महीनों में ही परसा पुलिस ने जिला न्यायालय में तस्करी में शामिल 13 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
उन्होंने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में परसा पुलिस ने जिले की सीमा चौकी से तस्करी के खतरे में पड़े 167 लोगों को बचाया।
उन्होंने बताया कि भारत में तस्करी की शिकार नेपाली लड़कियों और बच्चों को ज़्यादातर वेश्यावृत्ति, मनोरंजन, घरेलू नौकरों, उद्योगों में खतरनाक काम करने, अंग प्रत्यारोपण के लिए इस्तेमाल करने और यहाँ तक कि तस्करी के लिए भारत के रास्ते तीसरे देशों में ले जाने के लिए मजबूर किया जाता है।
अदाना इंडिया फाउंडेशन के निदेशक बिनोद खाती ने एक कार्य-पत्र प्रस्तुत करते हुए बताया कि संस्था ने 2024 में हैदराबाद, बैंगलोर, गुजरात, राजस्थान, बिहार, हरियाणा, दिल्ली आदि स्थानों से 52 नेपाली लड़कियों को बचाया है।
उन्होंने बताया कि जून 2025 तक इस प्रकार भारत के विभिन्न स्थानों से 50 नेपाली लड़कियों को बचाया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि कुल 102 में से 72 लड़कियों को भारतीय दूतावास के सहयोग से सफलतापूर्वक नेपाल वापस भेज दिया गया है। शेष लड़कियों को भारत में उनके अभिभावकों को सौंप दिया गया है और उनके परिवारों के साथ मिलन समारोह आयोजित किया गया है।
उन्होंने बताया कि इस दौरान नेपाल से भारत पहुँची 19 नाबालिग लड़कियों को भी बचाकर उनके घर वापस लाया गया।
अदाना नेपाल के उप निदेशक राम शरण पौडेल ने कहा कि भारतीय आश्रय गृहों में आश्रित नेपाली लड़कियों को वापस भेजने की प्रक्रिया जटिल है और दोनों देशों के संबंधित निकायों को इसमें सुधार के लिए कड़ी मेहनत करने की आवश्यकता है। भारत, बिहार, पूर्वी चंपारण, ज़िला बाल कल्याण समिति के सदस्य दिग्विजय कुमार ने कहा कि भारत में बचाई गई नेपाली लड़कियों को वापस नेपाल भेजने और आश्रय गृहों में आश्रय देने की प्रक्रिया भारत और नेपाल दोनों में लंबी और जटिल है और इसमें तुरंत सुधार किया जाना चाहिए।
उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि चूँकि गरीबी और बेरोज़गारी तस्करी की समस्या को बढ़ाती है, इसलिए दोनों देशों को इन समस्याओं को कम करने के लिए एक संयुक्त कार्यक्रम शुरू करना चाहिए।
नेपाल और भारत के मानव तस्करी नियंत्रण के क्षेत्र में कार्यरत गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों, सुरक्षाकर्मियों और अन्य हितधारकों ने बैठक में भाग लिया।







