सीमा संवाददाता जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
04/08/2025
काठमाण्डौ,नेपाल — पूर्वी सीमा पर काकड़भिट्टा में मानव तस्करी और कुंवारी लड़कियों की बिक्री के खिलाफ काम करने वाले आधा दर्जन से ज़्यादा गैर-सरकारी संगठन सक्रिय हैं।
नेपाल-भारत सीमा चौकी पर इन संगठनों की मौजूदगी के बावजूद, शुक्रवार को 16 से 21 साल की सात युवतियाँ संगठन के कर्मचारियों और पुलिस की नज़रों से बचकर मेची नदी पार करके भारत में घुस आईं। उनके साथ दो पुरुष भी थे।
चौकी पर तैनात भारतीय अर्धसैनिक बल (SSB) को इस समूह पर शक हुआ और उन्होंने ‘पहचान सत्यापन’ के दौरान उनसे पूछताछ की।
शुरुआती पूछताछ में पता चला कि वे विदेश में रोज़गार के लिए यात्रा कर रहे थे, जिसके बाद SSB ने दो पुरुषों सहित नौ लोगों को आगे की जाँच के लिए खोरीबाड़ी पुलिस को सौंप दिया।
खोरीबाड़ी पुलिस द्वारा आगे की जाँच में पता चला कि सभी सात युवतियों को हांगकांग भेजा जा रहा था। इससे भी गंभीर बात यह है कि उनके पास से भारतीय पासपोर्ट भी मिले।
मैती नेपाल काकड़भिट्टा के प्रमुख गोविंदा घिमिरे ने कहा, “हम लड़कियों को छुड़ाने और उन्हें उनके अभिभावकों को सौंपने के लिए पुलिस कार्यालय पहुँचे थे।” “पुलिस उन्हें वापस भेजने के लिए दस्तावेज़ तैयार कर रही थी।
हालाँकि, नेपाली दस्तावेज़ों के साथ भारतीय पासपोर्ट और आधार कार्ड मिलने के बाद, उन्होंने उन्हें जाने देने से इनकार कर दिया।”
पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया है और दोनों देशों के दस्तावेज़ों का इस्तेमाल करने के आरोप में जाँच कर रही है।
दार्जिलिंग के तोरीबारी निवासी 41 वर्षीय दीपेश गुरुंग और संखुवासभा के मकालू ग्रामीण नगर पालिका-3 निवासी 61 वर्षीय जापान गुरुंग को भी महिलाओं को हांगकांग भेजने वाले गिरोह में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। भारतीय पुलिस ने बताया है कि सभी सात महिलाएँ संखुवासभा जिले की हैं।
“अगर उनके पास भारतीय पासपोर्ट नहीं मिले होते, तो भारतीय पुलिस उन्हें हमें सौंप देती और वे नेपाल लौट जातीं,” घिमिरे ने स्पष्ट किया। “लेकिन पुलिस ने कहा कि दोनों देशों के दस्तावेज़ मिलने के बाद उन्हें रिहा नहीं किया जा सकता।”
पिछले साल भी ऐसी ही एक घटना हुई थी। धरान जिले की दो महिलाओं को मेची पुल पार करके भारत में प्रवेश करते समय नेपाली नागरिकता और भारतीय पासपोर्ट दिखाने पर गिरफ्तार किया गया।
इस बार भी यही घटना दोहराई गई है। पृष्ठभूमि में, यह खुलासा हुआ है कि मानव तस्करी में शामिल एक गिरोह नेपाली नागरिकों को भारतीय बनाकर हांगकांग भेजने की योजना बना रहा है।
हांगकांग ने 2005 से नेपाली नागरिकों के कामकाजी और घरेलू कामगार वीज़ा पर प्रतिबंध लगा दिया है। यही कारण है कि कई नेपाली महिलाओं को भारतीय नागरिक बनाकर हांगकांग भेजा जाता है।
हालाँकि हांगकांग भारतीय कामगारों के लिए एक आसान श्रम स्थल है, लेकिन यह अभी भी नेपालियों के लिए बंद है।
कुछ समय पहले, श्रम और रोजगार मंत्री शरत सिंह भंडारी ने कहा था कि बीजिंग हांगकांग को एक आकर्षक श्रम स्थल के रूप में विकसित करने के लिए पहल करेगा।
अनुमान है कि वर्तमान में हांगकांग में लगभग 30,000 नेपाली कामगार हैं। हालाँकि घरेलू कामगारों की माँग अधिक है, नेपाली महिलाओं को भारतीय पहचान पत्र और पासपोर्ट के साथ दलालों के माध्यम से हांगकांग जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
हांगकांग भारतीय घरेलू और कुशल कामगारों को आसानी से वीज़ा प्रदान करता है। भारत के साथ लंबे समय से चले आ रहे व्यापारिक, राजनीतिक और मानव संसाधन संबंधों के कारण, वहाँ वीज़ा प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल मानी जाती है।
इसी आधार पर, नेपाली महिलाओं को भारतीय वेश में हांगकांग भेजा जा रहा है। सिलीगुड़ी, बागडोगरा और भारत के अन्य इलाकों में फर्जी आधार कार्ड और पासपोर्ट बनाने वाले गिरोह सक्रिय हैं। ये गिरोह मोटी रकम लेकर भारतीय दस्तावेज़ बनाने के लिए जाने जाते हैं।
पुलिस जाँच में पता चला है कि मानव तस्करी में शामिल गिरोह भारतीय पासपोर्ट के साथ हांगकांग जाने के लिए प्रति व्यक्ति 3,00,000 से 5,00,000 रुपये तक वसूलता है। गिरफ्तार किए गए एक आरोपी ने भी इसी आशय का बयान दिया है।
चूँकि भारत में दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर, हैदराबाद और चेन्नई हवाई अड्डों से हांगकांग के लिए सीधी उड़ानें हैं, इसलिए ऐसा लगता है कि गिरोह नेपालियों को हांगकांग भेजने के लिए इन पाँच हवाई अड्डों का इस्तेमाल करता है।
दक्षिण भारत के बेंगलुरु स्थित केम्पेगौड़ा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 11 जून की रात को एक ऐसी ही घटना घटी। 26 वर्षीय एक नेपाली महिला को पुलिस ने टर्मिनल 2 से भारतीय पासपोर्ट के साथ हांगकांग जाने की कोशिश करते हुए पकड़ लिया।
नेपाल की सुष्मिता राई कुछ समय से हरियाणा में रह रही थीं। उन्होंने कैथे पैसिफिक की उड़ान CX 624 का टिकट बुक कराया था और उनके पास हांगकांग का रोज़गार वीज़ा भी था।
भारतीय आव्रजन अधिकारी जुबिन जॉनसन वैद्य द्वारा पुलिस में दर्ज कराई गई रिपोर्ट के अनुसार, वह रात 1:20 बजे की उड़ान के लिए रात 9:20 बजे टर्मिनल 2 पहुँची थीं। उनके पास उनका हवाई टिकट, हांगकांग का रोज़गार वीज़ा और भारतीय पासपोर्ट संख्या 859442 था।
हालाँकि, जब आव्रजन अधिकारी ने पहचान के लिए अतिरिक्त दस्तावेज़ मांगे, तो उन्होंने अपना भारतीय आधार कार्ड दिखाया। फिर, उन्होंने अपने मोबाइल पर अपना नेपाली राष्ट्रीय पहचान पत्र भी दिखाया। दो राष्ट्रीय पहचान पत्र रखने के आरोप में उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया।
चूँकि नेपाली नागरिकों को दो राष्ट्रीय पहचान पत्र या पासपोर्ट रखने की अनुमति नहीं है, इसलिए उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 336 (जाली दस्तावेज बनाना), 340 (जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करना) और पासपोर्ट अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करते पाए जाने पर 7 साल तक की कैद और पासपोर्ट अधिनियम 1967 के तहत 2 साल तक की कैद और 50,000 रुपये का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। विदेशी नागरिकों के मामले में, विदेशी नागरिक अधिनियम के तहत प्रावधान है कि उन्हें निर्वासित किया जा सकता है।
पुलिस के अनुसार, उसने पश्चिम बंगाल में अपना आधार कार्ड और वोटर आईडी बनवाया था। उसने इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट भी बनवाया था।







