काठमाण्डौ,नेपाल — अंतर्राष्ट्रीय सुत्र की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने अमेरिका से नए हथियार और विमान खरीदने की योजना को फिलहाल स्थगित करने का फैसला किया है।
बताया जा रहा है कि भारत ने यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय निर्यात पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के जवाब में उठाया है।
समाचार एजेंसी के अनुसार, तीन भारतीय अधिकारियों के हवाले से, भारत ने हथियारों की खरीद की घोषणा करने के लिए कुछ ही हफ्तों में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को वाशिंगटन भेजने की योजना बनाई थी। हालाँकि, अब यह दौरा रद्द कर दिया गया है।
रॉयटर्स के अनुसार, जनरल डायनेमिक्स लैंड सिस्टम्स द्वारा निर्मित ‘स्टाइकर’ लड़ाकू वाहनों और रेथियॉन व लॉकहीड मार्टिन द्वारा विकसित ‘जेवलिन’ एंटी-टैंक मिसाइलों की भारत द्वारा खरीद पर चर्चा फिलहाल स्थगित कर दी गई है।
हालाँकि, भारत ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर हथियारों पर बातचीत स्थगित होने की खबर को “झूठा और मनगढ़ंत” बताया।
इस हफ्ते की शुरुआत में ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने के बाद से दोनों देशों के बीच संबंधों में खटास आ गई है।
ट्रंप ने कहा कि यह कदम रूस-यूक्रेन युद्ध में मास्को को कथित वित्तीय सहायता देने के लिए भारत को दंडित करने के लिए उठाया गया है। इसके साथ ही, भारतीय निर्यात पर कुल सीमा शुल्क 50 प्रतिशत तक पहुँच गया है।
ट्रंप और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही फरवरी में इन वस्तुओं की खरीद और संयुक्त उत्पादन की योजना पर आगे बढ़ने की तैयारी कर ली थी।
रॉयटर्स ने एक भारतीय अधिकारी के हवाले से बताया कि जैसे-जैसे टैरिफ और दोनों देशों के बीच संबंधों की दिशा पर स्पष्टता आएगी, भारत रक्षा उपकरण खरीदने की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकता है।
नई दिल्ली इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कह रहा है कि उसे अनुचित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है, और यह भी बता रहा है कि अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगी अपने हितों के अनुसार मास्को के साथ व्यापार कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले भारतीय सामानों पर भारी टैरिफ के प्रभाव पर चर्चा के लिए एक उच्च-स्तरीय कैबिनेट बैठक बुलाई थी। हालाँकि, ट्रंप ने कहा है कि जब तक मौजूदा तनाव सुलझ नहीं जाता, वह भारत के साथ व्यापार वार्ता नहीं करेंगे।
एनडीटी विश्लेषण से पता चलता है कि ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध में मास्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए भारत पर दंडात्मक टैरिफ लगाए। भारत रूसी तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है। ट्रंप ने रूस को युद्धविराम पर सहमत होने के लिए 50 दिन की समयसीमा भी दी है। उन्होंने कहा था कि वह रूसी तेल के सभी खरीदारों पर दंडात्मक शुल्क लगाएंगे।
बाद में उन्होंने समयसीमा घटाकर 12 दिन कर दी, जो शुक्रवार को समाप्त हो गई। बताया जा रहा है कि भारतीय निर्यात पर लगाए गए शुल्क 27 अगस्त से लागू हो गए हैं।







