सीमा संवाददाता जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
22/08/2025
काठमाण्डौ,नेपाल – आम जनता पार्टी (AJP) के अध्यक्ष प्रभु साह ने नेपाल की भूमि लिपुलेख से होकर व्यापार मार्ग संचालित करने के लिए चीन और भारत द्वारा किए गए समझौते पर सरकार से जवाब माँगा है।
शुक्रवार को प्रतिनिधि सभा की बैठक में बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह मुद्दा नेपाल की भौगोलिक अखंडता और संप्रभुता से जुड़ा है। उन्होंने सरकार से ऐसे मुद्दों पर चुप न रहने का आग्रह किया।
उन्होंने पूछा, “नेपाल सरकार ने दस साल पहले दोनों देशों को एक राजनयिक नोट भेजा था कि नेपाल की भूमि, कालापानी, लिंपियाधुरा और लिपुलेख, हमारी भूमि है। अब जब ऐसी पहल की जा रही है, तो यह सवाल फिर क्यों उठा?”
उन्होंने कहा कि नेपाल के दोनों देशों में दूतावास हैं, और पूछा, “राजदूत क्या कर रहे हैं? अब राजदूतों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने का समय आ गया है।”
उन्होंने टिप्पणी की कि यह घटना यह भी दर्शाती है कि राजनीतिक दलों के नेताओं के करीबी सहयोगियों और पार्टी कार्यकर्ताओं को राजदूत बनाकर नेपाल की कूटनीतिक क्षमता कमज़ोर हो रही है।
उन्होंने याद दिलाया कि जब वे विपक्ष में थे, तब वर्तमान प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कहा था कि नेपाल का क्षेत्र वापस किया जाना चाहिए।
साह ने पूछा, “…वह कहते थे कि यह कोई समस्या नहीं है, बल्कि हमारा क्षेत्र वापस किया जाना चाहिए। वह इस समय दोनों देशों का दौरा कर रहे हैं। क्या यह मुद्दा उस यात्रा की पहली सूची में होगा या नहीं?”
उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि इस मुद्दे को बिना किसी राजनीतिक हथकंडे के आम सहमति से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।







