उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
14/10/2025
काठमाण्डौ,नेपाल —मधेश प्रदेश के मुख्यमंत्री सतीश कुमार सिंह ने अपनी ही पार्टी पर जनमत को प्रभावित करने और सरकार में शामिल दलों पर अपनी बात से मुकरने का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया है।
उन्होंने मंगलवार को मधेश प्रदेश विधानसभा में विश्वास मत प्रस्ताव पेश करने से पहले अपने संबोधन में इस्तीफा दे दिया।
उन्होंने कहा, “मैं सत्ता और प्रतिष्ठा के लिए नहीं, बल्कि जनता के लिए काम करना चाहता हूँ। मैं यहाँ जनता के कल्याण और संविधान की रक्षा के लिए खड़ा हूँ।”
उन्होंने आगे कहा, “मैं मौजूदा हालात में रास्ता बनाने के लिए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे रहा हूँ।”
प्रांतीय विधानसभा में अल्पमत में आने के बाद मुख्यमंत्री सिंह ने विश्वास मत हासिल किए बिना ही इस्तीफा दे दिया।
अध्यक्ष राम चंद्र मंडल ने उन्हें प्रांतीय प्रमुख को लिखित इस्तीफा सौंपने का निर्देश दिया है क्योंकि उन्होंने विश्वास मत हासिल नहीं किया था।
अध्यक्ष ने कहा कि चूँकि उन्होंने नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 188 (2) के अनुसार, प्रांतीय विधानसभा प्रक्रिया नियम 2075 बीएस के नियम 143 के उपनियम (4) के अनुसार अपना इस्तीफा दे दिया था, इसलिए उन्हें विश्वास मत प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी ने उन्हें बदनाम करने की साजिश रची है, जबकि वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के लिए तैयार थे।
उन्होंने कहा, ‘जब मैं इस्तीफा देने की तैयारी कर रहा था, तब मुझसे एक शब्द भी पूछे बिना मुझे वापस बुलाने वाला एक पत्र सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया।’ ‘क्या यह तानाशाही प्रवृत्ति नहीं है?’
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें मनमाने ढंग से, तानाशाही तरीके से और कानून का उल्लंघन करके बदनाम किया गया है।
उन्होंने कहा, ‘मेरे चरित्र पर हमला किया गया।’ उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी ने उनके खिलाफ मीडिया ट्रायल चलाकर एक झूठी कहानी गढ़ी है।
उन्होंने दावा किया कि उन्हें इसलिए रोका गया क्योंकि सरकार और विपक्षी दल के सदस्य इस्तीफा देने की स्थिति में नहीं थे। ‘अब आपका इस्तीफा संघवाद के लिए खतरा बन सकता है।’ मुख्यमंत्री सिंह ने पार्टी नेताओं के हवाले से कहा, “आपको इस्तीफ़ा नहीं देना चाहिए, वरना सारी ज़िम्मेदारी आपको लेनी पड़ेगी।
जिन पार्टियों ने ऐसा कहा था, उन्होंने बाद में अपना विचार बदल दिया। मैं आपसे भी आग्रह करता हूँ कि आप अपनी छाती पर हाथ रखकर इस मामले पर आत्मचिंतन करें।”







