उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
16/10/2025
काठमाण्डौ,नेपाल -बांग्लादेश के अभियोजकों ने गुरुवार को देश छोड़कर भाग चुकीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के विरुद्ध अपराधों के लिए मृत्युदंड देने का अनुरोध अदालत में प्रस्तुत किया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, हसीना ने जुलाई-अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व वाले विद्रोह के दमन के दौरान एक घातक दमन का आदेश दिया था, जिसमें 1,400 लोग मारे गए थे। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट ने भी इन झड़पों में जान-माल के बड़े नुकसान की पुष्टि की है।
मुख्य अभियोजक ताजुल इस्लाम ने अदालत के बाहर संवाददाताओं से कहा, “हम उनके लिए अधिकतम सजा की मांग कर रहे हैं। एक हत्या के लिए मृत्युदंड सामान्य है, लेकिन 1,400 हत्याओं के लिए कम से कम एक मृत्युदंड उचित है।”
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 78 वर्षीय हसीना इस घटना का केंद्र थीं और जुलाई-अगस्त के विद्रोह के दौरान किए गए सभी अपराध उन्हीं के इर्द-गिर्द केंद्रित थे। इस मामले की सुनवाई दो पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थिति में चल रही है।
पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल फरार हैं, जबकि पूर्व पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून हिरासत में हैं और उन्हें दोषी ठहराया गया है। अभियोजन पक्ष ने कमाल के लिए मृत्युदंड की भी माँग की है।
1 जून से शुरू हुए मुकदमे में महीनों तक चली गवाही के दौरान हसीना की भूमिका आरोपों के केंद्र में रही है।
अभियोजन पक्ष ने कहा, “उनका लक्ष्य अपने और अपने परिवार के लिए सत्ता पर स्थायी रूप से काबिज रहना था।”
इस बीच, यह पुष्टि हो गई है कि हसीना पिछले साल भारत से लौटने के अदालती आदेश की अवहेलना करते हुए देश छोड़कर भाग गई थीं।







