उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
26/10/2025
काठमाण्डौ,नेपाल – आदिदेव सूर्य की आराधना के महापर्व छठ के दूसरे दिन खरना मनाया जा रहा है।
पूरे दिन उपवास रखने के बाद, शाम को व्रती चावल, दूध और चीनी मिलाकर बनी खीर बनाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करके खरना मनाते हैं।
इस खीर को घर के सभी सदस्यों द्वारा प्रसाद के रूप में ग्रहण करने और उन घरों में वितरित करने की भी परंपरा है जहाँ कोई व्रत नहीं होता है।
बच्चों और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हुए चार दिनों तक मनाया जाने वाला यह पर्व कल, शनिवार को ‘नहाय-खाय’ अनुष्ठान के साथ शुरू हुआ।
इस दिन व्रती स्नान करके, अरबा-अरबाइन और शुद्ध भोजन ग्रहण करके आगामी व्रत की तैयारी करते हैं।
कल, सोमवार को, छठ पर्व का तीसरा और मुख्य दिन, सौजकारक, यानी व्रती जलाशय में जाकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
मंगलवार सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद छठ पर्व औपचारिक रूप से संपन्न होगा।
छठ पर्व के दौरान बाँस की ढाकी, डगरी, मिट्टी के कोसिया-कुरबर और हांडी चढ़ाई जाती है।
प्रसाद में ठकुवा, भुसुआ, केला, गन्ना, हल्दी, अदरक, विभिन्न मिठाइयाँ और फल शामिल होते हैं।
भक्तगण 48 घंटे तक बिना पानी पिए कठोर व्रत रखने की परंपरा रखते हैं। चूँकि सभी व्यंजन और अनुष्ठान अत्यंत कठोरता से तैयार किए जाते हैं, इसलिए छठ को अत्यंत कठोरता वाला पर्व माना जाता है।







