उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
27/10/2025
काठमाण्डौ,नेपाल – बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बने दो निम्न-दाब प्रणालियों के प्रभाव से नेपाल में मंगलवार से शुक्रवार तक बारिश होने की संभावना है।
आशंका है कि इसका ज़्यादा असर इलाम जिला और कोशी क्षेत्र के अन्य ज़िलों पर पड़ सकता है, जो पिछले अक्टूबर में भूस्खलन से क्षतिग्रस्त हुए थे, और चावल की फ़सल को भी नुकसान पहुँच सकता है।
लेकिन इन मौसम प्रणालियों के सकारात्मक पहलू भी हैं। त्रिभुवन विश्वविद्यालय के केंद्रीय जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफ़ेसर मदन सिगदेल कहते हैं, ‘इससे आने वाले दिनों में हिमालय क्षेत्र में बर्फबारी होगी और हमें पिछले साल की तरह काले हिमालय का नज़ारा नहीं देखना पड़ेगा।’ ‘यह प्रणाली कृषि में मदद करेगी और प्रदूषण की मात्रा को भी कुछ हद तक कम करेगी।’
इस संदर्भ में, मौसम विज्ञानी सिगदेल से बिनोद घिमिरे की बातचीत:
*किस तरह की मौसम प्रणाली का नेपाल पर प्रभाव पड़ने की बात कही जा रही है?*
इस समय नेपाल मुख्यतः दो मौसम प्रणालियों से प्रभावित हो रहा है। एक बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रही है, जिसे ‘मोंथा चक्रवात’ नाम दिया गया है। यह वर्तमान में भारत के ओडिशा-विशाखापत्तनम के आसपास के तटीय क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है। दूसरी प्रणाली अरब सागर में विकसित हो रही है और भारत के गुजरात क्षेत्र में प्रवेश करने वाली है। इन दोनों प्रणालियों के प्रभाव से इस सप्ताह मौसम थोड़ा अस्थिर रहने की संभावना है।
*इसका प्रभाव कब शुरू होगा? यह कहाँ और कैसे प्रभावित करेगा?*
विशेष रूप से, अरब सागर से आने वाली प्रणाली के मंगलवार से ही नेपाल को प्रभावित करने की संभावना है। यह प्रणाली विशेष रूप से नेपाल के पश्चिमी भागों में बारिश का कारण बनेगी। विशेष रूप से, इसका प्रभाव सुदूर पश्चिम में केंद्रित होकर लुंबिनी प्रांत के पश्चिमी भाग तक पहुँचने की संभावना है। इसका प्रभाव मंगलवार और बुधवार तक रहने की उम्मीद है।
इसके बाद, बंगाल की खाड़ी की प्रणाली गुरुवार से फिर से प्रभावित करेगी। इसके उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने की उम्मीद है। इसका प्रभाव गुरुवार शाम से शनिवार तक रहने की उम्मीद है। इसका प्रभाव नेपाल के मध्य भाग से पूर्व तक रहने की उम्मीद है। यह मुख्यतः मधेश और कोशी प्रांतों में सक्रिय वर्षा का कारण बनता है।
इसका कुछ प्रभाव काठमाण्डौ घाटी सहित बागमती प्रांत के जिलों में भी देखा जा सकता है। लेकिन इसका केंद्र पूर्वी मधेश और कोशी प्रांतों पर है।
इस प्रकार, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में दो प्रणालियाँ इस पूरे सप्ताह प्रतिकूल मौसम का कारण बनने की आशंका है।
*ये प्रणालियाँ कितनी शक्तिशाली हैं?*
इस पर अभी भी कड़ी नज़र रखने की ज़रूरत है। क्योंकि यह अभी भारत के तटीय क्षेत्रों की ओर आ रहा है। भारत में प्रवेश करने के बाद, इसकी शक्ति, दिशा और गति को देखकर ही हम नेपाल में संभावित वर्षा के आकलन के बारे में अधिक कह सकते हैं। आज सुबह की स्थिति को देखते हुए, नेपाल में मध्यम से भारी वर्षा का अनुमान लगाना संभव है।
इसके प्रभाव से मध्यम से भारी वर्षा होने और बाढ़ व भूस्खलन का खतरा बढ़ने की संभावना है। लेकिन यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि पश्चिमी नेपाल की तुलना में पूर्वी नेपाल में वर्षा की तीव्रता अधिक प्रतीत होती है।
पिछले अक्टुबर में ही, बाढ़ और भूस्खलन ने इलाम जिला में भारी नुकसान पहुँचाया था। अब जबकि यह सिस्टम फिर से पूर्वी क्षेत्र पर केंद्रित है, क्या खतरा और भी नहीं बढ़ गया है?
चूँकि पहले भी भूस्खलन से ज़मीन कमज़ोर हुई है, इसलिए हल्की बारिश भी भूस्खलन का कारण बन सकती है। इसलिए, थोड़ा और सावधान रहना बेहतर है। संभावित नुकसान को रोकने और वाहनों की आवाजाही में बाधा डालने से बचने के लिए, विशेष तैयारियाँ अपनाना बेहतर है।
*नुकसान को कम करने के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?*
चूँकि भूस्खलन के जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान पहले ही हो चुकी है, इसलिए ज़िला आपदा तंत्र को सतर्क रहना चाहिए और लोगों को, खासकर रात में, सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी देनी चाहिए।
*क्या इस सिस्टम के कोई सकारात्मक प्रभाव हैं?*
बिल्कुल। इस सिस्टम के कारण उत्तरी क्षेत्र में बर्फबारी होगी। चूँकि बर्फबारी होने पर पहाड़ सफेद चमकेंगे, इसलिए पिछले साल की तरह काले पहाड़ दिखाई नहीं देंगे। जब पहाड़ सफेद हो जाएँगे, तो पर्यटक आकर्षित होंगे और पर्यटन क्षेत्र को लाभ होगा।
चूँकि पहाड़ हमारी जल प्रणाली का एक महत्वपूर्ण आधार हैं, इसलिए इसके कई लाभ हैं। इससे पर्वतीय और पहाड़ी क्षेत्रों के जल संसाधनों को मदद मिलेगी। इससे ज़मीन में नमी बनी रहेगी और कृषि फसलों को भी फ़ायदा होगा। एक और महत्वपूर्ण लाभ यह है कि इससे प्रदूषण में कुछ हद तक कमी आएगी।
*क्या मानसून के तुरंत बाद विकसित हुई ये दोनों प्रणालियाँ सामान्य हैं या असामान्य?*
इस समय (अक्टूबर) समुद्र के तापमान के प्रभाव से चक्रवातों का बनना असामान्य नहीं है, यह एक सामान्य मौसमी प्रक्रिया है।







