भारत के विभिन्न शहरो से 16 बच्चे को बचाए गए

 

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
30/10/2025

काठमाण्डौ,नेपाल – दो बच्चे बस से सप्तरी जिला से जनकपुर पहुँचे। 7 और 9 साल के इन बच्चों को ट्रेन में बिठाने के लिए जनकपुर लाया गया।

9 साल के एक बच्चे ने बताया, “बस से उतरने के बाद, उन्हें सीधे रेलवे स्टेशन ले जाया गया। जैसे ही हम ट्रेन में चढ़े, वह चलने लगी। कुछ भी नहीं मिला।”

भारत के मुंबई, नई दिल्ली और बिहार के विभिन्न जिलों से बचाए गए 16 बच्चों को गुरुवार को उनके परिवारों को सौंप दिया गया। मधेश सीमा के रास्ते अलग-अलग समय पर भारत लाए गए 14 लड़कों और 2 लड़कियों को बुधवार को बचाकर जनकपुर लाया गया। बचाए गए बच्चों की उम्र 7 से 14 साल के बीच है। ये धनुषा, महोत्तरी, सिराहा, सप्तरी और रौतहट जिला के रहने वाले हैं।

केआईजी नेपाल के नवीन जोशी ने बताया कि दोनों लड़कियों को उस समय बचाया गया जब उन्हें यौन गतिविधियों के लिए बेचा जाने वाला था।

मधेश प्रांत सरकार के खेल एवं समाज कल्याण मंत्रालय द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में जोशी ने कहा, “दोनों लड़कियों का बार-बार यौन शोषण किया गया। हम उन्हें तब बचा पाए जब वे बेचे जाने के लिए तैयार थीं।

लड़कियों में से एक को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या है। उसे इलाज और परामर्श की ज़रूरत है।”

जोशी के अनुसार, मधेश प्रांत की सीमा का इस्तेमाल महिलाओं और बच्चों को भारत ले जाने के लिए किया जा रहा है।

जोशी ने कहा, “हमारे अध्ययन से पता चला है कि कई महिलाओं और बच्चों को मधेश सीमा के ज़रिए भारत ले जाया जा रहा है। हाल ही में, मधेश प्रांत के बच्चों को भारत ले जाया गया है और उनसे जोखिम भरे काम करवाए गए हैं।”

उनके अनुसार, नेपाली बच्चों का भारत में किडनी निकालने, यौनकर्मियों, नौकरानियों, ऑर्केस्ट्रा और सर्कस में इस्तेमाल तेज़ी से हो रहा है।

भारत के नई दिल्ली में रहने वाले जोशी ने बताया कि पिछले एक साल में भारत स्थित नेपाली दूतावास की मदद से 1,000 लोगों को बचाया गया है।

जोशी ने कहा, “नेपाली महिलाओं और लड़कियों को शुरुआत में फ्लैटों में रखा जाता है और व्हाट्सएप के ज़रिए देह व्यापार में लगाया जाता है।” “वे व्हाट्सएप पर तस्वीरें भेजते हैं और महिलाओं और लड़कियों को 5,000 से 8,000 रुपये में एकमुश्त सौदा करके ले जाते हैं। बाद में, वे उन्हें वेश्यालयों में बेच देते हैं।”

भारत से बचाए गए 16 बच्चों को रोटरी क्लब रूपन्देही लुम्बिनी की मदद से स्वदेश वापस लाया गया। क्लब के अध्यक्ष परशुराम परजुली ने कहा कि चूँकि भारत या अन्य देशों में बहला-फुसलाकर लाए जा रहे बच्चों की संख्या अधिक है, इसलिए बचाव कार्य और स्वदेश वापसी अभियान में सभी का सहयोग आवश्यक है।

नेपाल सरकार के पूर्व सचिव भीम उपाध्याय ने शिकायत की कि बच्चों को बचाने में सरकार से ज़्यादा सहयोग नहीं मिला है।

मधेश सरकार के खेल एवं समाज कल्याण मंत्रालय के सचिव रंजीत कुमार यादव ने कहा कि कानून होने के बावजूद, उनके क्रियान्वयन में कमी के कारण भारत में बहला-फुसलाकर लाए जाने और जोखिम भरे कामों में धकेले जाने वाली महिलाओं और बच्चों की संख्या में वृद्धि हुई है।

सचिव यादव ने कहा, “प्रांतीय सरकार मधेश प्रांत से बच्चों के बचाव, वापसी और उनके इलाज या परामर्श के लिए एक अलग कोष स्थापित करेगी।” प्रांतीय सरकार महिलाओं और बच्चों के क्षेत्र में कार्यरत संगठनों के साथ समन्वय करके इस मामले में आगे बढ़ेगी।

जनकपुरधाम स्थित बाल खोज एवं बचाव कार्यालय के प्रमुख संजीव महतो ने बताया कि पिछले वर्ष मधेश प्रांत के 61 बच्चों को भारत से बचाकर उनके परिवारों को सौंप दिया गया।

उन्होंने बताया कि उस अवधि के दौरान नेपाल में लापता हुए लगभग 115 बच्चों को ढूंढकर उनके माता-पिता को सौंप दिया गया।

Please Share this News
  • Ramchandra Rawat

    चीप एडिटर - इंडिया न्यूज़ जक्शन

    सम्बंधित ख़बर

    पत्रकार सत्यम मिश्रा के हमलावरों की तत्काल हो गिरफ्तारी – सेराज अहमद कुरैशी

      गोंडा, उत्तर प्रदेश। इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन ® के राष्ट्रीय अध्यक्ष सेराज अहमद कुरैशी ने पत्रकार सत्यम मिश्रा पर हुए हमले की कड़ी शब्दों निंदा करते हुए कहा कि पत्रकारों…

    Please Share this News

    सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन सीजन-2 की विजेता बनीं नगमा खातून, जीता फ्री उमराह पैकेज व ट्राफी

      सीरतुन्नबी, कुरआन और साइंस के तालमेल पर हुआ विशेष व्याख्यान। कलमा शरीफ पढ़ने की मुहिम भी शुरू, दो करोड़ 39 लाख 58 हजार 838 दुरूद शरीफ पेश की। सेराज…

    Please Share this News

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *