उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
05/11/2025
काठमाण्डौ,नेपाल – भारत की शीर्ष वित्तीय अपराध जाँच एजेंसी, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कहा है कि उसने उद्योगपति अनिल अंबानी से जुड़ी विभिन्न कंपनियों की 84.6 करोड़ डॉलर (करीब 75 अरब रुपये) से ज़्यादा की संपत्ति ज़ब्त की है। यह कार्रवाई बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग की एक बड़ी जाँच का हिस्सा
है।
एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी के छोटे भाई अनिल अंबानी पिछले दो दशकों से अपने व्यापारिक साम्राज्य के पतन को लेकर विवादों में घिरे रहे हैं। कभी ऊर्जा से लेकर दूरसंचार और रक्षा क्षेत्र तक फैले विशाल व्यापारिक साम्राज्य के मालिक रहे अनिल अंबानी अब विभिन्न वित्तीय अनियमितताओं की जाँच के केंद्र में हैं।
ईडी ने सोमवार शाम जारी एक बयान में कहा कि कार्यालय परिसर, आवासीय इकाइयों और लगभग 132 एकड़ (53 हेक्टेयर) ज़मीन सहित संपत्तियों को ज़ब्त कर लिया गया है। एजेंसी ने कहा, “रिलायंस अनिल अंबानी समूह की विभिन्न कंपनियों ने धोखाधड़ी से सार्वजनिक धन का गबन किया है और संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस अवैध आय को सही दावेदारों को वापस दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।”
ईडी की जाँच भारत के केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा अगस्त में दर्ज एक आपराधिक मामले के आधार पर शुरू की गई थी।
बताया जा रहा है कि यह मामला देश के सबसे बड़े बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) द्वारा दर्ज की गई धोखाधड़ी की शिकायत से उत्पन्न हुआ है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि रिलायंस कम्युनिकेशंस ने बैंक के धन का दुरुपयोग किया और लगभग 29.29 अरब रुपये का नुकसान पहुँचाया।
इस बीच, अनिल अंबानी द्वारा नियंत्रित कंपनी रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने सोमवार को एक बयान जारी कर कहा कि ईडी के फैसले का उसके नियमित व्यावसायिक कार्यों पर “कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा”।
कंपनी के एक प्रवक्ता ने अंबानी की ओर से कहा, “उन्होंने सभी आरोपों का पुरजोर खंडन किया है और कानूनी तौर पर अपना बचाव करेंगे।”
अंबानी 2018 में भी सार्वजनिक रूप से सुर्खियों में आए थे जब विपक्षी नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उन पर फ्रांस के साथ राफेल लड़ाकू विमान सौदे में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया था। हालाँकि, दोनों पक्षों ने आरोपों से इनकार किया था।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने दिसंबर 2018 में मामले की जाँच की माँग को खारिज कर दिया था, और तब विवाद को औपचारिक रूप से समाप्त माना गया था।
ईडी की नवीनतम कार्रवाई ने एक बार फिर अनिल अंबानी को भारतीय वित्तीय क्षेत्र और कानूनी अधिकारियों की नजरों में ला दिया है।







