भारत ने घातक कार विस्फोट को ‘राष्ट्र-विरोधी ताकतों द्वारा आतंकवादी हमला’ बताया

 

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
13/11/2025

काठमाण्डौ,नेपाल – भारत सरकार के मंत्रिमंडल ने इस सप्ताह राजधानी नई दिल्ली में हुए घातक कार विस्फोट को ‘राष्ट्र-विरोधी ताकतों द्वारा आतंकवादी हमला’ बताया है। हालाँकि, सरकार ने इस घटना से संबंधित कोई नया सबूत जारी नहीं किया है।

सोमवार को ऐतिहासिक लाल किले के पास हुए विस्फोट में आठ लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए।

अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि उन्होंने जाँच के सिलसिले में विवादित कश्मीर क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों से कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया है।

भारत सरकार मंगलवार से इस घटना की जाँच कर रही है और इसे एक संभावित आतंकवादी हमला मान रही है, जिससे अधिकारियों को व्यापक कानूनी शक्तियाँ मिल जाती हैं।

बुधवार रात मंत्रिमंडल द्वारा पारित एक प्रस्ताव में इस घटना को ‘राष्ट्र-विरोधी ताकतों द्वारा आतंकवाद का एक जघन्य कृत्य’ बताया गया। लाल किला, जहाँ प्रधानमंत्री हर स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र को संबोधित करते हैं, भारतीय गौरव का प्रतीक माना जाता है। अगर यह एक सुनियोजित हमला साबित होता है, तो यह 2011 के बाद से भारतीय राजधानी में हुआ सबसे घातक विस्फोट होगा।

– *कश्मीर में गिरफ़्तारियाँ और जाँच-पड़ताल -*

मंगलवार रात पुलवामा ज़िले में की गई छापेमारी में कम से कम पाँच लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। विस्फोट से कुछ घंटे पहले, कश्मीर में सक्रिय सुरक्षा बलों ने नई दिल्ली के बाहरी इलाके फरीदाबाद में एक संदिग्ध आतंकी गिरोह को ध्वस्त करने की घोषणा की थी। दो डॉक्टरों समेत सात लोगों को गिरफ़्तार किया गया और भारी मात्रा में विस्फोटक और हथियार बरामद किए गए।

सुत्र ने फरीदाबाद गिरोह और लाल किला विस्फोट के बीच संभावित संबंध होने का संदेह जताया है। हालाँकि, पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। नाम न छापने की शर्त पर पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस गिरोह का पता 19 अक्टूबर को श्रीनगर के आसपास लगे भारत विरोधी पोस्टरों से चला। इन पोस्टरों में भारतीय सुरक्षाकर्मियों पर हमला करने की धमकी दी गई थी।

सीसीटीवी फुटेज की मदद से शुरुआती तीन संदिग्धों की पहचान की गई।

अगले दिनों में दो कश्मीरी डॉक्टरों और कुछ अन्य लोगों को भी गिरफ़्तार किया गया। स्थानीय मीडिया ने बताया कि जिस कार में विस्फोट हुआ उसका चालक भी कश्मीरी था।

पुलिस इस बात की भी जाँच कर रही है कि क्या फरीदाबाद के एक मेडिकल कॉलेज में पढ़ाने वाला एक डॉक्टर कार चला रहा था। कुछ रिपोर्टों से पता चलता है कि हो सकता है कि उसने विस्फोट से बचने के लिए जानबूझकर बम विस्फोट किया हो या फिर वह गलती से किसी विस्फोटक उपकरण के ज़रिए पहुँच गया हो।

दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता संजय त्यागी ने कहा कि जाँच दल “सभी पहलुओं – आतंकवादी हमला, आकस्मिक विस्फोट या यांत्रिक खराबी – की जाँच कर रहा है।”

पुलवामा की शगुफ्ता जान नाम की एक महिला ने चिंता व्यक्त की कि उसका डॉक्टर भाई शुक्रवार से लापता है।

उसने कहा, “उसने हमें फ़ोन करके बताया था कि वह घर आ जाएगा, लेकिन कोई संपर्क नहीं हो पाया।” पुलिस सोमवार रात उसके परिवार के सदस्यों को भी पूछताछ के लिए ले गई।

– *भारत-पाक तनाव फिर से बढ़ने की आशंका -*

इस घटना ने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव फिर से बढ़ने की चिंताएँ बढ़ा दी हैं।

भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर अपनी धरती पर आतंकवादी हमलों को बढ़ावा देने का आरोप लगाता रहा है। इस्लामाबाद इन आरोपों से इनकार करता है।

इस साल अप्रैल में, कश्मीर में हुए एक हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें ज़्यादातर हिंदू तीर्थयात्री थे। नई दिल्ली ने इस घटना के लिए पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहराया, जिसके बाद से दोनों देशों के बीच सैन्य गतिरोध बना हुआ है।

भारत और पाकिस्तान दोनों कश्मीर पर आंशिक रूप से शासन करते हैं, लेकिन दोनों ही पूरे क्षेत्र पर अपना दावा करते हैं।

कश्मीरी विद्रोही 1989 से भारतीय नियंत्रण के विरुद्ध लड़ रहे हैं। भारत इस संघर्ष को पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद कहता है, जबकि पाकिस्तान इसे कश्मीरी लोगों का “स्वतंत्रता संग्राम” बताता है।

नई दिल्ली में पहले भी कई बड़े आतंकवादी हमले हुए हैं। 1996 में लाजपत नगर बाज़ार में हुए एक कार बम विस्फोट में 13 लोग मारे गए थे, और 2008 में एक सुनियोजित बम विस्फोट में 20 लोग मारे गए थे। कश्मीरी आतंकवादी समूहों और एक भारतीय इस्लामी छात्र संगठन पर भी इन घटनाओं में शामिल होने का आरोप लगाया गया था।

नई दिल्ली में हुए हालिया कार बम विस्फोटों ने न केवल राजधानी की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि कश्मीर विवाद और भारत-पाकिस्तान संबंधों में नए सिरे से अशांति का संकेत भी दिया है।

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  • Ramchandra Rawat

    चीप एडिटर - इंडिया न्यूज़ जक्शन

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