इथियोपिया में 12,000 साल बाद ज्वालामुखी फटने के बाद भारत और नेपाल का क्या हुआ?

 

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
27/11/2025

काठमाण्डौ,नेपाल – इथियोपिया में 12,000 साल बाद हेली गुब्बी नाम का ज्वालामुखी फटा है।

धमाके से निकली राख और सल्फर डाइऑक्साइड की धूल और धुआं करीब 15 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंच गया।

सुत्रो के मुताबिक, धमाके से निकला राख और सल्फर डाइऑक्साइड का बादल यमन, ओमान, भारत, नेपाल और चीन होते हुए लाल सागर को पार कर गया।

यह बादल भारत के राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली और पंजाब में भी फैल गया, जो इथियोपिया से 4,300 किलोमीटर दूर हैं।

इंडिया मेटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट ने कहा कि राख का बादल मंगलवार से साफ हो गया है और नेपाल के आसमान के रास्ते भारत से चीन चला गया है।

*भारत आने-जाने वाली हवाई उड़ानों पर असर*

धमाके की वजह से आसमान में बने बादलों और धूल के कणों की वजह से एयर इंडिया ने अपनी 11 उड़ानें कैंसिल कर दीं।

एक्सपर्ट्स ने कहा है कि बादलों की ज़्यादा ऊंचाई की वजह से आम लोगों की ज़िंदगी पर कोई असर नहीं पड़ा है।

इथियोपिया में ज्वालामुखी फटने से किसी इंसानी नुकसान की खबर नहीं है।

हालांकि, यमन और ओमान की सरकारों ने अपने नागरिकों को सावधानी बरतने की चेतावनी दी है।

बादलों की वजह से हवाई जहाज़ों की उड़ानों पर असर पड़ा। सुत्रो ने बताया कि ‘इंटरनेशनल एविएशन प्रोटोकॉल’ के हिसाब से सावधानी बरती गई क्योंकि ज्वालामुखी की वजह से आसमान में उड़ी राख हवाई जहाज़ों के इंजन को नुकसान पहुंचा सकती थी।

*नेपाल में भी हवाई उड़ानों पर असर*

ज्वालामुखी फटने से निकले धूल के कणों वाला बादल 43,000 फीट तक ऊंचा है। यह नेपाल के आसमान में भी है।

हालांकि, हाइड्रोलॉजी और मौसम विज्ञान विभाग के सीनियर मौसम विज्ञानी बरुन पौडेल ने कहा कि चूंकि यह बहुत ऊंचा है, इसलिए नेपाली लोगों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा।

पौडेल ने कहा, “नेपाल में इसे अहमियत नहीं दी गई क्योंकि यह बहुत ऊंचा था।” “अगर बारिश होती, तो एसिड नीचे गिरता, लेकिन चूंकि बारिश नहीं हुई, इसलिए इसका कोई असर नहीं हुआ।”

हालांकि, नेपाल जाने वाली सात इंटरनेशनल फ्लाइट्स रोक दी गईं।

*साइंटिफिक स्टडी के लिए एक बहुत कम मिलने वाला मौका*

साइंटिस्ट्स ने हज़ारों साल बाद हुए ज्वालामुखी विस्फोट को इथियोपिया के इतिहास की सबसे अनोखी घटनाओं में से एक बताया है।

सुत्र के मुताबिक, विस्फोट के साथ बहुत ज़्यादा सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) भी निकला, जिससे पर्यावरण और सेहत पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता बढ़ गई है।

एमिरेट्स एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी के प्रेसिडेंट इब्राहिम अल जारवान ने कहा कि ज्वालामुखी से अचानक SO2 का निकलना धरती पर हाई प्रेशर का संकेत समझना चाहिए।

उन्होंने कहा कि मैग्मा धरती में घूम रहा है और फिर से फट सकता है।

अल जारवान ने कहा, “यह घटना साइंटिस्ट्स के लिए एक बहुत कम मिलने वाला मौका है। वे लंबे समय तक विस्फोट के साथ ज्वालामुखी की करीब से स्टडी कर सकते हैं।”

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  • Ramchandra Rawat

    चीप एडिटर - इंडिया न्यूज़ जक्शन

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