दिल्ली की तीन महिला पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार के खिलाफ इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने आंदोलन का किया ऐलान
राष्ट्रपति के नाम पांच सूत्रीय ज्ञापन भेजकर निष्पक्ष जांच, एफआईआर और पत्रकार सुरक्षा की उठाई आवाज
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
दिल्ली के जंतर-मंतर एवं संसद मार्ग थाना क्षेत्र में तीन महिला पत्रकारों के साथ दिल्ली पुलिसकर्मियों द्वारा कथित दुर्व्यवहार, अभद्रता एवं यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन ® ने कड़ा रुख अपनाया है। संगठन ने मामले को पत्रकारों की गरिमा, महिला सुरक्षा, प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए राष्ट्रपति के नाम सम्बोधित पांच सूत्रीय ज्ञापन जिलाधिकारी गोरखपुर की अनुपस्थिति में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अतुल श्रीवास्तव जी को देकर उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है।
ज्ञापन में आरोपों की निष्पक्ष जांच, विधिसम्मत एफआईआर, महिला पत्रकारों की सुरक्षा, पुलिस कार्रवाई के दौरान पारदर्शी मीडिया-पुलिस प्रोटोकॉल तथा राष्ट्रीय स्तर पर पत्रकार सुरक्षा कानून जल्द लागू करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई है। ज्ञापन की प्रतिलिपि माननीय गृहमंत्री, माननीय सचिव गृह मंत्रालय व अध्यक्ष प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को भी ईमेल से भेज कर कार्यवाही की मांग की।
इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सेराज अहमद कुरैशी ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के प्रहरी हैं और उनके साथ किसी भी प्रकार का कथित दुर्व्यवहार लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा, “पत्रकार किसी सत्ता या पुलिस व्यवस्था के विरोधी नहीं हैं, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करने वाले महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। यदि किसी महिला पत्रकार के साथ ड्यूटी के दौरान दुर्व्यवहार या उत्पीड़न का आरोप सामने आता है तो उसकी निष्पक्ष जांच होना और पीड़ित को न्याय मिलना बेहद जरूरी है। जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं तो दोषी चाहे किसी भी पद पर हो, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।”
कुरैशी ने कहा कि पत्रकारों की आवाज दबाने अथवा शिकायतों को लंबित रखने से पत्रकार समुदाय में असुरक्षा की भावना पैदा होती है। उन्होंने कहा, “इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन पत्रकारों के सम्मान, सुरक्षा, स्वाभिमान और अधिकारों के लिए संघर्ष करता रहा है और आगे भी संघर्ष करता रहेगा। पत्रकार सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।” उन्होंने राष्ट्रपति से मांग की कि मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उच्चस्तरीय निगरानी में जांच कराई जाए तथा आवश्यकता होने पर स्वतंत्र महिला न्यायिक अधिकारी अथवा सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की जाए। साथ ही पीड़ित महिला पत्रकारों को किसी भी प्रकार के दबाव या प्रताड़ना से सुरक्षा प्रदान की जाए।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि देशभर में पत्रकारों, विशेषकर महिला पत्रकारों की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने सरकार से राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा तंत्र स्थापित करने तथा पत्रकारों पर हमले, धमकी, उत्पीड़न और पुलिस दुर्व्यवहार की शिकायतों के त्वरित निस्तारण की व्यवस्था करने की मांग की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि पत्रकारों के सम्मान और अधिकारों के लिए है। दोषी कोई भी हो, कानून से ऊपर कोई नहीं होना चाहिए और निर्दोष किसी भी स्थिति में प्रताड़ित नहीं होना चाहिए। निष्पक्ष जांच ही न्याय का आधार है।”
ज्ञापन में इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने यह भी मांग की कि धरना, प्रदर्शन एवं समाचार कवरेज के दौरान पत्रकारों के साथ पुलिस के व्यवहार के लिए स्पष्ट मीडिया-पुलिस आचार संहिता लागू की जाए तथा महिला पत्रकारों के साथ आवश्यक पुलिस कार्रवाई में महिला पुलिसकर्मियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़े इस मामले में यदि अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती है तो संगठन लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए बाध्य होगा।
इस अवसर पर राष्ट्रीय महासचिव मोहम्मद इरफ़ानुल्लाह खान, मंडल सचिव सतीश चंद्र, जिला प्रवक्ता मोहम्मद आजम खान, आशुतोष कुमार, अजमेर खान अवधेश कुमार श्रीवास्तव, ललित कुमार सिंह, श्रवण कुमार गुप्ता, मेराज अहमद, डाॅ. वेद प्रकाश निषाद, अमरजीत साहनी, अंशुल वर्मा आदि पत्रकार गण उपस्थित रहें।







