उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
24/09/2025
काठमाण्डौ,नेपाल – आज दशईं नवरात्रि का तीसरा दिन है, चंद्रघंटा देवी की पूजा की जा रही है।
घटस्थापना के साथ देवी के नौ रूपों की पूजा की परंपरा के अनुसार, आज चंद्रघंटा की पूजा की जा रही है।
आज, विशेष रूप से संगीत और गायन के क्षेत्र से जुड़े लोग चंद्रघंटा देवी की पूजा करते हैं।
दशईं की शुरुआत से ही, आज देवी मंदिरों में भी भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। काठमाण्डौ घाटी के गुह्येश्वरी, मैतीदेवी, दक्षिणकाली, भद्रकाली, नक्सल भगवती, कालिकास्थान, शोभा भगवती, तलेजू भवानी, बिजेश्वरी, इंद्रायणी और अन्य मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ है।
घाटी के बाहर, भक्त शक्तिपीठों जैसे धरान जिला में दंतकाली, भोजपुर जिला में सिद्धकाली, तापलेजंग जिला में पाथिभरा, गोरखा जिला में मनकामना, दांग जिला में अंबिकेश्वरी में भी आते हैं।
नवरात्रि के नौ दिनों में, पहले दिन शैलपुत्री, दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी और तीसरे दिन चंद्रघंटा देवी की पूजा की जाती है।
इसी प्रकार, चौथे दिन कूष्मांडा, पाँचवें दिन स्कंदमाता, छठे दिन कात्यायनी, सातवें दिन कालरात्रि, आठवें दिन महागौरी और नौवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।
माना जाता है कि पार्वती के सुंदर अवतार माने जाने वाले चंद्रघंटा की पूजा करने से साधक में वीरता और निर्भयता के साथ-साथ सौम्यता और विनम्रता का भी विकास होता है।
चंद्रघंटा देवी के सिर पर अर्धचंद्र का आभूषण है और यह मुकुट घंटी जैसा दिखता है, इसलिए शास्त्रों में वर्णित चंद्रघंटा नाम पड़ा। श्रीमद् देवी भगवद् गीता जैसे धर्मग्रंथों में उल्लेख है कि वे क्रोध और हिंसा जैसी अमानवीय और राक्षसी प्रवृत्तियों का नाश करने तथा धर्मात्माओं की रक्षा करने के लिए अवतरित हुए थे।







