उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
27/11/2025
काठमाण्डौ,नेपाल – भारत सरकार ने रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPMs) का प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए $800 मिलियन से ज़्यादा के प्लान को मंज़ूरी दी है, जिसका मकसद चीन समेत बाहरी सोर्स पर अपनी बढ़ती डिपेंडेंस को कम करना है।
इस कदम से ज़रूरी टेक्नोलॉजी सेक्टर में देश की सप्लाई सिक्योरिटी मज़बूत होने की उम्मीद है।
REPMs, जो रेयर अर्थ एलिमेंट के एलॉय से बने होते हैं, हाई-स्ट्रेंथ मैग्नेट होते हैं जिनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक गाड़ियों, एयरोस्पेस, डिफेंस टेक्नोलॉजी, विंडमिल और दूसरे रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम में बड़े पैमाने पर होता है।
भारत अभी अपनी ज़्यादातर डिमांड इम्पोर्ट से पूरी करता है, लेकिन सरकार का अनुमान है कि 2030 तक देश की इनकी ज़रूरत दोगुनी हो जाएगी।
इस संदर्भ में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट ने मंगलवार को 72.8 बिलियन भारतीय रुपये ($815.3 मिलियन) के प्रोडक्शन प्रमोशन प्लान को मंज़ूरी दी।
सरकार ने एक बयान में कहा कि यह पहल “घरेलू इंडस्ट्रीज़ की सप्लाई चेन को सुरक्षित करके लंबे समय तक आत्मनिर्भरता बनाएगी।”
यह स्कीम प्रोडक्शन से सीधे जुड़े इंसेंटिव और सब्सिडी देगी, जिससे हर साल लगभग 6,000 मीट्रिक टन की प्रोडक्शन कैपेसिटी बनाने में मदद मिलेगी।
सरकार के मुताबिक, यह अपनी तरह की पहली नेशनल पहल है, जिसका मकसद भारत में 6,000 MTPA का इंटीग्रेटेड RESPM प्रोडक्शन बेस बनाना है, जिससे देश ग्लोबल मार्केट में एक कॉम्पिटिटिव और प्रभावशाली प्लेयर बन सके।
लोकल इंडस्ट्री ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ACMA) का मानना है कि इससे भारतीय ऑटो इंडस्ट्री की सप्लाई चेन को लंबे समय तक स्टेबिलिटी और लचीलापन मिलेगा।
ACMA के प्रेसिडेंट विक्रमपति सिंघानिया ने एक बयान में कहा, “यह स्कीम एडवांस्ड मटीरियल में इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देगी और भारत को इलेक्ट्रिक और क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी के लिए ग्लोबल वैल्यू चेन में मजबूती से जगह दिलाएगी।”
उन्होंने इस कदम को “इलेक्ट्रिक गाड़ियों और एडवांस्ड मोबिलिटी सिस्टम में सबसे बड़ी कमी को दूर करने के लिए एक दूरदर्शी और स्ट्रेटेजिक दखल” बताया।
हालांकि भारत कई देशों से रेयर अर्थ मैग्नेट इंपोर्ट करता है, लेकिन इस साल की शुरुआत में चीन के एक्सपोर्ट पर रोक लगाने से कुछ भारतीय इंडस्ट्री में चिंता बढ़ गई थी।
सरकार के इस नए कदम को पहले से ही कमज़ोर सप्लाई चेन को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।







