मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर में डीजल संकट से जनजीवन अस्त-व्यस्त

 

कई पेट्रोल पंपों पर खत्म हुआ डीजल, घंटों लाइन में खड़ी जनता; किसान, परिवहन और बाजार व्यवस्था पर गहराया संकट

गोरखपुर(विनय तिवारी )। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर में इन दिनों डीजल संकट ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। जिले के कई पेट्रोल पंपों पर डीजल पूरी तरह खत्म हो चुका है, जबकि कुछ स्थानों पर सीमित मात्रा में ही ईंधन दिया जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि सुबह से देर रात तक पेट्रोल पंपों के बाहर वाहनों की लंबी कतारें लगी हुई हैं और लोग घंटों इंतजार करने के बावजूद खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं।
डीजल की घटती आपूर्ति और लगातार बढ़ती मांग ने शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया है। लोग एक पंप से दूसरे पंप तक भटक रहे हैं। कहीं “डीजल समाप्त” का बोर्ड लगा है तो कहीं केवल चुनिंदा लोगों को सीमित मात्रा में ईंधन मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अब हालात ऐसे हो गए हैं कि डीजल जैसी बुनियादी जरूरत के लिए भी “पहचान और सिफारिश” का सहारा लेना पड़ रहा है। कई नागरिक व्यंग्य करते हुए कहते नजर आए—
“पहले नौकरी के लिए सोर्स लगता था, अब डीजल और गैस के लिए भी सोर्स लगाना पड़ रहा है।”
पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें, लोगों में बढ़ती बेचैनी
गोरखपुर शहर और आसपास के इलाकों में अधिकांश पेट्रोल पंपों पर सुबह से भारी भीड़ देखी जा रही है। वाहन चालक इस उम्मीद में घंटों लाइन में खड़े रहते हैं कि शायद उनकी बारी आने तक डीजल उपलब्ध रह जाए, लेकिन कई मामलों में स्टॉक खत्म होने की घोषणा के बाद लोगों को वापस लौटना पड़ रहा है।
पंप संचालकों का कहना है कि उन्हें पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति नहीं मिल पा रही है। पहले जहां नियमित रूप से टैंकर पहुंचते थे, वहीं अब सीमित सप्लाई के कारण कुछ ही घंटों में पूरा स्टॉक खत्म हो जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों का कहना है कि कई किलोमीटर का सफर तय करने के बाद भी उन्हें डीजल नहीं मिल पा रहा।
किसानों की बढ़ी चिंता, खेती-किसानी पर संकट
डीजल संकट का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ता दिखाई दे रहा है। खेती-किसानी से जुड़े अधिकांश कार्य डीजल पर निर्भर हैं। ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, सिंचाई पंप और अन्य कृषि उपकरणों के संचालन में दिक्कतें बढ़ने लगी हैं।
किसानों का कहना है कि यह खेती के महत्वपूर्ण कार्यों का समय है और यदि समय पर जुताई व सिंचाई नहीं हो पाई तो फसल प्रभावित हो सकती है। ग्रामीण इलाकों में किसान सुबह से शाम तक पेट्रोल पंपों पर लाइन में खड़े दिखाई दे रहे हैं।
एक किसान ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा,
“सरकार किसान को देश की रीढ़ बताती है, लेकिन आज किसान डीजल के लिए दर-दर भटक रहा है।”
वहीं दूसरे किसान ने कहा,
“खेती करें या डीजल की लाइन में लगें? अगर डीजल नहीं मिलेगा तो फसल कैसे बचेगी?”
परिवहन व्यवस्था पर असर, बाजारों में बढ़ी चिंता
डीजल की कमी का असर अब परिवहन व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। ट्रक, बस, टैक्सी, ऑटो और मालवाहक वाहन चालकों का कहना है कि ईंधन की अनुपलब्धता के कारण उनका काम प्रभावित हो रहा है।
ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि कई वाहन खड़े होने लगे हैं और माल ढुलाई प्रभावित हो रही है। यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर असर पड़ सकता है, जिससे बाजार में महंगाई और बढ़ने की आशंका है।
एक ट्रक चालक ने कहा,
“डीजल नहीं मिलेगा तो गाड़ी कैसे चलेगी? गाड़ी नहीं चलेगी तो घर कैसे चलेगा?”
महंगाई और बेरोजगारी के बीच बढ़ी जनता की मुश्किलें
गोरखपुर की जनता पहले से ही महंगाई और बेरोजगारी की मार झेल रही है। रसोई गैस, पेट्रोल, डीजल और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की परेशानियां बढ़ा दी हैं।
युवाओं का कहना है कि रोजगार के अवसर कम होते जा रहे हैं और अब डीजल संकट ने दैनिक जीवन को और कठिन बना दिया है।
एक युवक ने कहा,
“डिग्री लेकर घूम रहे हैं, नौकरी नहीं है और अब डीजल के लिए भी लाइन लगानी पड़ रही है।”
“क्या यही हैं अच्छे दिन?” — जनता के सवाल
डीजल संकट को लेकर लोग अब खुलकर सवाल उठा रहे हैं। जनता का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री के गृह जनपद की यह स्थिति है, तो प्रदेश के अन्य जिलों का हाल क्या होगा?
लोगों का कहना है कि एक ओर लगातार बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी से आम आदमी परेशान है, वहीं दूसरी ओर डीजल और गैस जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।
प्रशासनिक दावों पर उठ रहे सवाल
हालांकि प्रशासन की ओर से स्थिति जल्द सामान्य होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हालात अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आपूर्ति सामान्य है तो पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें क्यों हैं? कई पंपों पर डीजल खत्म क्यों हो रहा है? किसानों और वाहन चालकों को राहत क्यों नहीं मिल पा रही?
कालाबाजारी और जमाखोरी की आशंका
स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने आशंका जताई है कि डीजल संकट के पीछे कालाबाजारी और जमाखोरी भी एक बड़ी वजह हो सकती है। सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
जनता में बढ़ता आक्रोश, तत्काल समाधान की मांग
डीजल संकट को लेकर जनता के बीच नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। किसानों, व्यापारियों, वाहन चालकों और सामाजिक संगठनों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।
लोगों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर राहत चाहिए। यदि समय रहते हालात नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में संकट और गंभीर हो सकता है।
जनता की आवाज
“सुबह से लाइन में खड़े हैं, लेकिन हर बार कहा जाता है कि स्टॉक खत्म हो गया।” — वाहन चालक
“तीन-तीन पेट्रोल पंप घूमने के बाद भी ट्रैक्टर के लिए डीजल नहीं मिला।” — किसान
“महंगाई ने पहले ही हालत खराब कर रखी है, अब डीजल के लिए भी भटकना पड़ रहा है।” — गृहिणी
“अगर मुख्यमंत्री के गृह जनपद की यह हालत है, तो बाकी प्रदेश का क्या हाल होगा?” — स्थानीय व्यापारी
“जनता को अब भाषण नहीं, समाधान चाहिए।” — सामाजिक कार्यकर्ता

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  • Ramchandra Rawat

    चीप एडिटर - इंडिया न्यूज़ जक्शन

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