सीमा संवाददाता जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
07/08/2025
काठमाण्डौ,नेपाल – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ (सीमा शुल्क) लगा दिया है। यह नया टैरिफ पहले से लागू 25 प्रतिशत टैरिफ के अतिरिक्त है, जिससे कुल टैरिफ 50 प्रतिशत हो जाता है।
ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित कार्यकारी आदेश के अनुसार, यह अतिरिक्त टैरिफ आदेश जारी होने की तारीख से 21 दिनों के बाद प्रभावी होगा।
बुधवार को जारी व्हाइट हाउस के आदेश के अनुसार, भारत सरकार वर्तमान में रूस से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से तेल आयात कर रही है। इसी आधार पर, अमेरिका ने भारत से आने वाले सभी सामानों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का फैसला किया है।
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद, भारत द्वारा रूस से आयातित कच्चे तेल की मात्रा में तेज़ी से वृद्धि हुई थी। 2018 तक, रूस से भारत में आयातित कच्चे तेल का हिस्सा केवल 1.8 प्रतिशत था, लेकिन 2025 तक यह मात्रा 35 प्रतिशत तक पहुँच जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि अतिरिक्त शुल्क लगाने के अमेरिका के इस फैसले से अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान काफी महंगे हो सकते हैं। उनके अनुसार, अमेरिका को भारत के निर्यात में भी 40 से 50 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है।
*भारत ने अमेरिका के फैसले को अनुचित, अनुचित और अतार्किक बताया*
अमेरिका के इस फैसले के बाद, भारत के विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि यह ‘अनुचित, अनुचित और अतार्किक’ है।
भारत ने स्पष्ट किया है कि 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उसे रूस से तेल आयात करना होगा।
अमेरिका ने भारत पर अतिरिक्त शुल्क लगाने के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है और कहा है, ‘अमेरिका ने रूसी तेल के आयात पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का फैसला किया है। जबकि कई अन्य देश भी अपने राष्ट्रीय हित में ऐसा ही कर रहे हैं। हम दोहराते हैं कि अमेरिका का यह कदम अनुचित, अनुचित और अतार्किक है। भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।’
*अमेरिकी फैसले के बाद कांग्रेस ने मोदी की आलोचना की*
अमेरिका के इस फैसले के बाद, भारतीय कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की है। कांग्रेस ने एक्स (जिसे पहले ट्विटर कहा जाता था) पर एक पोस्ट में लिखा, ‘नरेंद्र मोदी के दोस्त ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है। ट्रंप लगातार भारत के खिलाफ कदम उठा रहे हैं, लेकिन नरेंद्र मोदी उनका ज़िक्र तक नहीं करते। मोदीजी, ट्रंप को जवाब देने की हिम्मत कीजिए।’
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी एक्स में लिखा, ‘ट्रंप का 50 प्रतिशत टैरिफ एक तरह का आर्थिक ब्लैकमेल है। भारत को अनुचित व्यापार समझौतों के लिए डराने-धमकाने की कोशिश। प्रधानमंत्री मोदी को अपनी कमज़ोरियों को भारतीय लोगों के हितों पर हावी नहीं होने देना चाहिए।’
*क्या कहते हैं विशेषज्ञ?*
इस फैसले के साथ, भारत अब अमेरिका के उन व्यापारिक साझेदारों में शामिल हो गया है जिन पर सबसे ज़्यादा टैरिफ लगता है। चीन, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धियों से कहीं ज़्यादा। इससे भारत के अमेरिका को होने वाले 86.5 अरब डॉलर के वार्षिक निर्यात (कपड़ा से लेकर मशीनरी तक) का एक बड़ा हिस्सा ख़तरे में पड़ सकता है।
उनके अनुसार, 2024 में चीन ने 62.6 अरब डॉलर मूल्य का रूसी तेल आयात किया, जो भारत के 52.7 अरब डॉलर मूल्य के आयात से ज़्यादा है, लेकिन चीन के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
श्रीवास्तव के अनुसार, “वाशिंगटन चीन के खिलाफ कार्रवाई करने से डरता है क्योंकि चीन अमेरिकी रक्षा और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कच्चे माल – जैसे गैलियम, जर्मेनियम, रेयर अर्थ और ग्रेफाइट – की आपूर्ति को नियंत्रित करता है।”
वे कहते हैं, “अमेरिका ने अपने सहयोगियों के रूसी व्यापार पर भी आँखें मूंद ली हैं। पिछले साल, यूरोपीय संघ ने रूस से 39.1 अरब डॉलर मूल्य का सामान आयात किया, जिसमें 25.2 अरब डॉलर का तेल शामिल था। अमेरिका ने स्वयं रूस से 3.3 अरब डॉलर के सामरिक संसाधन आयात किए।”
अजय श्रीवास्तव के अनुसार, टैरिफ अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान को महंगा बना सकते हैं और अमेरिका को भारत के निर्यात में 40 से 50 प्रतिशत की कमी ला सकते हैं।
*ट्रंप के विशेष दूत की पुतिन से मुलाकात के बाद ट्रंप का फैसला सार्वजनिक*
सुत्र के अनुसार, ट्रंप ने भारत पर अतिरिक्त टैरिफ की घोषणा ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ की मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के बाद की।
यह बैठक यूक्रेन में युद्धविराम पर रूसी समझौते के लिए शुक्रवार की समय सीमा से पहले हुई।
इससे पहले, ट्रंप ने कहा था कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि अमेरिका रूस से यूरेनियम, उर्वरक और रसायन जैसे सामान आयात करता है।
भारत ने अमेरिका को चुनौती दी थी और इस बारे में सवाल उठाए थे।
*एक पत्रकार द्वारा पूछा गया प्रश्न और ट्रंप का जवाब*
एक पत्रकार ने ट्रंप से पूछा, “अमेरिका भी रूस से यूरेनियम, रसायन और उर्वरक आयात करता है, लेकिन भारत के तेल आयात पर आपत्ति जताता है। आपका जवाब क्या है?”
ट्रंप ने जवाब दिया, “मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता। मैं इसके बारे में पता करूँगा और बाद में आपको बताऊँगा।”
उन्होंने पहले भी रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर जल्द ही टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। ट्रंप ने भारत पर बड़ी मात्रा में रूसी तेल खरीदने और उसे दूसरे देशों को बेचकर मुनाफा कमाने का आरोप लगाया था।
*भारत की प्रतिक्रिया क्या थी?*
भारत ने पिछले सोमवार को अमेरिका को चेतावनी दी थी और यूरोपीय संघ पर टिप्पणी करते हुए कहा था, ‘सिर्फ़ इसलिए भारत को निशाना बनाना अनुचित और तर्कहीन है क्योंकि वह रूस से कच्चा तेल खरीदता है।’
भारतीय विदेश मंत्रालय ने साफ़ कहा था, ‘अमेरिका और यूरोप ख़ुद भी रूस के साथ व्यापार कर रहे हैं, लेकिन वे भारत के साथ दोहरा मापदंड अपना रहे हैं।’
मंत्रालय ने कहा था कि यूरोप रूस से न सिर्फ़ ऊर्जा, बल्कि उर्वरक, खनिज, रसायन, लोहा-इस्पात और मशीनरी भी खरीद रहा है। अमेरिका अपने परमाणु उद्योग के लिए यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए पैलेडियम, उर्वरक और रसायन रूस से आयात कर रहा है। इसलिए, रूस से तेल खरीदने के लिए भारत पर शुल्क लगाना अनुचित है।







