सीमा संवाददाता जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
21/08/2025
काठमाण्डौ,नेपाल – भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात की है।
भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ऐसे समय रूस पहुँचे हैं जब अमेरिका सीमा शुल्क बढ़ाकर उस पर रूसी तेल न खरीदने का दबाव बढ़ा रहा है।
मॉस्को पहुँचे विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि उन्होंने अपने समकक्ष लावरोव के साथ रूस के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर विस्तार से बातचीत की।
जयशंकर ने कहा कि बातचीत में भारत और रूस के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, स्वास्थ्य और रक्षा साझेदारी जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
उन्होंने कहा, “हमने यूक्रेन, यूरोप, ईरान, पश्चिम एशिया, अफ़ग़ानिस्तान और भारतीय उपमहाद्वीप पर अपना पक्ष रखा है। हमने संयुक्त राष्ट्र, जी20, एससीओ और ब्रिक्स में सहयोग पर भी चर्चा की है।”
*”हम रूस से तेल के सबसे बड़े खरीदार नहीं हैं”*
कुछ दिन पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर रूसी तेल खरीदकर रूस की आर्थिक मदद करने और यूक्रेन में युद्ध अपराध करने का आरोप लगाया था।
ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने भी भारत पर रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदकर भारी मुनाफा कमाने का आरोप लगाया है।
हालांकि, विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि रूसी तेल के खरीदारों की सूची में वे पहले नंबर पर नहीं हैं। उन्होंने कहा, “हम रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदार नहीं हैं, बल्कि चीन है।”
अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) की ओर इशारा करते हुए, विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि वे रूस से प्राकृतिक गैस के सबसे बड़े खरीदार हैं।
उन्होंने कहा, “हम रूसी एलएनजी (प्राकृतिक गैस) के सबसे बड़े खरीदार नहीं हैं, मैं पक्के तौर पर नहीं कह सकता, लेकिन शायद यूरोपीय संघ है।”
जयशंकर का दावा है कि कुछ साल पहले, अमेरिका ने ही भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया था।
“हम वही देश हैं जिसके बारे में अमेरिका ने कुछ साल पहले कहा था कि हमें अंतरराष्ट्रीय बाज़ार को स्थिर करने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए, जिसमें रूस से तेल ख़रीदना भी शामिल है।
संयोग से, हम अमेरिका से भी तेल ख़रीदते हैं और उसकी मात्रा पहले से कहीं ज़्यादा बढ़ गई है।”







