उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
18/09/2025
काठमाण्डौ,नेपाल – भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट अब पहले जैसा नहीं रहा। एक ज़माना था जब ये दोनों पड़ोसी टीमें क्रिकेट के मैदान पर भिड़ती थीं और हर तरफ़ धूम मचा देती थीं।
पहले क्रिकेट का स्तर ऊँचा हुआ करता था, जिसमें बेहतरीन बल्लेबाज़ी और गेंदबाज़ी होती थी। अब इन दोनों के बीच क्रिकेट का फीकापन दिखने लगा है। इसका एक उदाहरण मौजूदा एशिया कप क्रिकेट में देखने को मिल रहा है।
भारत ने पाकिस्तान को आसानी से 7 विकेट से हरा दिया। पिछले कुछ समय से पाकिस्तानी क्रिकेट भारत को वैसी चुनौती देना बंद कर चुका है। इसीलिए उसने अपनी स्वाभाविक चमक काफी हद तक खो दी है। ऐसे में शायद भारत और पाकिस्तान क्रिकेट के बहिष्कार का नारा भी मैदान पर उतरते ही कमज़ोर पड़ने लगा है। उस एशिया कप मैच में पहले बल्लेबाज़ी करने वाली पाकिस्तान 127 रनों पर सिमट गई थी।
इसके बाद भारत ने सिर्फ़ 15.5 ओवर में जीत हासिल कर ली। भारत कभी दबाव में नहीं दिखा। और तो और, दो विरोधी टीमें जब मैदान पर उतरती हैं तो जो सनसनी पैदा करती हैं, वो इस बार देखने को नहीं मिली। कुछ मीडिया संस्थानों ने शाहिद शाह अफरीदी के खिलाफ शुभमन गिल की चर्चा की, तो कुछ ने पाकिस्तानी स्पिनरों के खिलाफ भारतीय स्पिनरों की। लेकिन किसी ने इसे भी गंभीरता से नहीं लिया।
इसके बजाय, मैच से पहले खबर यह थी कि भारतीय टीम को पाकिस्तान के खिलाफ क्रिकेट न खेलने की सलाह दी गई थी। यह मैच भारत के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की पृष्ठभूमि में खेला गया था। मैच खत्म होने पर सबने एक ही बात कही, भारत की जीत बस एक ‘आम जीत’ थी। सिर्फ़ इसी मैच में ही नहीं, पाकिस्तानी टीम ने भारत के खिलाफ बल्ले और गेंद, दोनों से अपना प्रदर्शन कमज़ोर करना शुरू कर दिया है।
यही वजह है कि दुबई में यह मैच देखने आए दर्शकों से दुबई क्रिकेट ग्राउंड भरा नहीं था।
इस क्रिकेट स्टेडियम की क्षमता लगभग 25,000 थी और एक-चौथाई सीटें खाली थीं। टिकटों की बिक्री भी धीमी रही। अंत में, सभी टिकट नहीं बिके। पहले दोनों टीमों के समर्थक ऐसे ही मैच देखने के लिए दुबई जाते थे। इस बार यह चलन ज़्यादा देखने को नहीं मिला। ऐसा न होने से तो अच्छा ही है।
इन सबके बीच, गलत घटनाक्रम भी सुर्खियाँ बन गए। वे मुख्य समाचार बने रहे। उदाहरण के लिए, टॉस के दौरान भी, भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष सलमान आगा से हाथ नहीं मिलाया।
मैच के बाद भी, भारतीय खिलाड़ी पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाना चाहते थे। दोनों ही मौकों पर, ऐसा सद्भावना अपरिहार्य लग रहा था। बदले में, पाकिस्तानी कप्तान मैच के बाद की कॉन्फ्रेंस में नहीं आए।
भारतीय कप्तान और खिलाड़ियों के इस व्यवहार की कई लोग आलोचना कर रहे हैं।
पाकिस्तानी पक्ष पहले ही इसकी औपचारिक शिकायत कर चुका है। वे चाहते हैं कि किसी न किसी के खिलाफ कार्रवाई की जाए। पाकिस्तानी कोच माइक हेसन ने भी अपनी निराशा व्यक्त की है। हालाँकि, सूर्यकुमार ने इसका जवाब देने की कोशिश की है। उन्होंने कहा, ‘कुछ चीजें खेलों से भी ऊँची होती हैं।’
खेल विशेषज्ञ यह मानने लगे हैं कि पाकिस्तानी क्रिकेट का स्तर वाकई गिर गया है। वह भी भारत के खिलाफ।
उदाहरण के लिए, 2024 चैंपियंस ट्रॉफी से लेकर उसी साल के ट्वेंटी-20 विश्व कप और 2023 के वनडे विश्व कप तक, पाकिस्तान इन सभी में भारत को अपेक्षित चुनौती देने में विफल रहा। एक बार फिर, पाकिस्तान के घरेलू क्रिकेट में विवादों और आरोपों के अलावा कुछ नहीं बचा है।







