उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
10/10/2025
काठमाण्डौ,नेपाल – इस साल देश भर में जापानी इंसेफेलाइटिस संक्रमण से 31 लोगों की मौत हो चुकी है।
स्वास्थ्य सेवा विभाग के परिवार कल्याण प्रभाग की बाल स्वास्थ्य एवं टीकाकरण शाखा के प्रमुख डॉ. अभियान गौतम ने बताया कि नेपाल में जापानी इंसेफेलाइटिस संक्रमण से होने वाली मौतों की संख्या पिछले 10 सालों में सबसे ज़्यादा है।
2024 में जापानी इंसेफेलाइटिस से 25 लोगों की, 2023 में सात लोगों की और 2017 में केवल एक व्यक्ति की मौत हुई। 2018 से 2022 तक जापानी इंसेफेलाइटिस से किसी की मौत नहीं हुई।
गौतम ने कहा, “मौतों की संख्या पिछले 10 सालों की तुलना में अब ज़्यादा है।
ज़्यादातर मौतें 40 साल से ज़्यादा उम्र के उन लोगों में हुई हैं जिनका टीकाकरण नहीं हुआ है।”
उनके अनुसार, इस साल 164 लोगों में और पिछले साल 86 लोगों में जापानी इंसेफेलाइटिस संक्रमण देखा गया।
टीकाकरण शाखा के प्रमुख डॉ. गौतम ने बताया कि टीके के धीरे-धीरे असर करना बंद करने के बाद भी, संक्रमण से मौतें हो रही हैं।
जापानी इंसेफेलाइटिस अब 42 जिलों की 110 नगर पालिकाओं में फैल चुका है।
उन्होंने कहा, “पिछले आँकड़ों को देखें तो जापानी इंसेफेलाइटिस के मामले बढ़ रहे हैं।
हम इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि यह मच्छरों की सक्रियता के कारण है या सुअर या बत्तख पालन के कारण।”
उनके अनुसार, इस वर्ष 31 लोगों की मौत हुई है, जिनमें कोशी प्रांत में चार, मधेश में तीन, बागमती में पाँच, गंडकी में पाँच, लुम्बिनी में 11, कर्णाली में एक और सुदूरपश्चिम प्रांत में दो लोग शामिल हैं।
28 जिले इंसेफेलाइटिस के उच्च जोखिम वाले हैं। यह रोग विशेष रूप से श्रावण से कार्तिक तक फैलता है।
नेपाल में 82 प्रतिशत बच्चों को जापानी इंसेफेलाइटिस का टीका लगाया जा चुका है।
1998 से एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों को जापानी इंसेफेलाइटिस के खिलाफ नियमित रूप से टीका लगाया जा रहा है।
जापानी इंसेफेलाइटिस पहली बार 1978 में नेपाल के रूपन्देही में देखा गया था। जापान में यह 1861 में देखा गया था।
टीकाकरण शाखा प्रमुख डॉ. गौतम ने बताया कि 1990 से जापानी इंसेफेलाइटिस के संक्रमण में वृद्धि हो रही है। तब से, सरकार राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत हर साल पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को नियमित रूप से इंसेफेलाइटिस का टीका लगा रही है।







