सीमा संवाददाता जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
29/07/2025
काठमाण्डौ,नेपाल—सीमा विवादों के समाधान हेतु नेपाल-भारत संयुक्त कार्य समूह (बीडब्ल्यूजी) की सातवीं बैठक सोमवार को दिल्ली में शुरू हुई। 13 सदस्यीय बीडब्ल्यूजी की यह बैठक छह वर्षों के अंतराल के बाद आयोजित की गई।
पिछले सप्ताह दिल्ली में दोनों देशों के बीच गृह सचिव स्तर की बैठक हुई थी। वह बैठक भी नौ वर्षों के अंतराल के बाद हुई थी।
बीडब्ल्यूजी की बैठक का नेतृत्व नेपाल की ओर से सर्वेक्षण विभाग के महानिदेशक प्रकाश जोशी और भारत की ओर से सर्वेक्षण विभाग के प्रमुख हितेश कुमार कर रहे हैं।
दिल्ली स्थित सुषमा स्वराज भवन में शुरू हुई यह बैठक मंगलवार को समाप्त होगी।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में अब तक हुए कार्यों की समीक्षा और आगे किए जाने वाले कार्यों पर चर्चा की जा रही है। बैठक में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि दोनों पक्ष सीमा पर रुके हुए तकनीकी कार्यों को फिर से शुरू करने के लिए सौहार्दपूर्ण बातचीत कर रहे हैं।
नेपाल की ओर से इस समूह बैठक में विदेश, गृह, रक्षा, कानून एवं भूमि सुधार मंत्रालयों के प्रतिनिधि, सशस्त्र पुलिस बल के उप महानिरीक्षक और दिल्ली स्थित दूतावास के अधिकारी भाग ले रहे हैं।
दोनों देशों ने सीमा पर पुराने विवादों और भविष्य की समस्याओं के समाधान हेतु 2014 में BWG का गठन किया था।
2019 तक, यह तंत्र हर साल नियमित रूप से बैठकें करता रहा था। हालाँकि, कोविड महामारी और सीमा विवादों के कारण, बैठकें नियमित रूप से नहीं हो सकीं। 2019 में देहरादून में आयोजित छठी बैठक में हुई चर्चाओं और समझौतों को इस सातवीं बैठक का प्रारंभिक बिंदु माना जाता है।
यह तंत्र सीमा स्तंभों के निर्माण, मरम्मत और पुनर्वास के लिए भी ज़िम्मेदार है। इसी प्रकार, इसे दस गजा क्षेत्र में अतिक्रमणों का एक संयुक्त रिकॉर्ड तैयार करने और दस गजा को स्वच्छ रखने की प्रक्रिया तैयार करने, सीमा स्तंभों का GPS सर्वेक्षण करने और SAPMA चार्टर जारी करने का भी दायित्व दिया गया है। यह सीमा पार नागरिकों की संपत्ति का रिकॉर्ड भी तैयार करता है। इसे एक देश के नागरिकों की दूसरे देश में कृषि भूमि के लिए एक संयुक्त लागत तैयार करने और ऐसी समस्याओं के समाधान का रास्ता खोजने का कार्य भी सौंपा गया है। इस समूह को सहयोग देने और इसके निर्णयों को क्रियान्वित करने के लिए एक ‘सर्वेक्षण अधिकारी समिति’ और एक ‘क्षेत्रीय सर्वेक्षण दल’ का गठन किया गया है।
यह सुस्ता और कालापानी जैसे लंबित सीमा मुद्दों पर विदेश सचिव स्तरीय तंत्र को आवश्यक सहायता प्रदान करता है।
1 नवंबर, 1981 को गठित ‘नेपाल-भारत संयुक्त तकनीकी सीमा समिति’ ने 1,880 किलोमीटर लंबी सीमा का 97 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया था।
समिति सुस्ता और लिपुलेख-लिंपियाधुरा-कालापानी क्षेत्रों का सीमांकन पूरा नहीं कर सकी। सीमांकन का कार्य 31 दिसंबर, 2007 को रोक दिया गया था।
समिति के भंग होने के बाद, सीमा पर आवश्यक तकनीकी कार्य पूरा करने के लिए 2014 में ‘बीडब्ल्यूजी’ का गठन किया गया।
इस समूह के गठन के लिए एक समझौते पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली नेपाल यात्रा के दौरान काठमांडू में हस्ताक्षर किए गए थे।
सुस्ता और कालापानी के विवादित क्षेत्रों को छोड़कर, दोनों देशों के बीच सीमांकन का काम पूरा हो चुका है। 2014 में सीमा कार्य समूह का गठन उन क्षेत्रों में तकनीकी कार्य पूरा करने के लिए किया गया था जहाँ सीमांकन को लेकर कोई विवाद नहीं है। इसके कार्यक्षेत्र में अतिक्रमण मुक्त ‘नो मैन्स लैंड’ को साफ़ करना, सीमा चिह्न स्थापित करना और बाढ़ व भूस्खलन के कारण अपनी पहचान खो चुके सीमावर्ती क्षेत्रों की तकनीक का उपयोग करके पहचान करना शामिल है।
नेपाल-भारत अंतर्राष्ट्रीय सीमा को अलग करने वाले 8,553 सीमा स्तंभ हैं। कुछ साल पहले के आँकड़ों के अनुसार, इनमें से 2,716 गायब पाए गए थे। एक सर्वेक्षण से पता चला था कि लगभग 1,600 सीमा स्तंभ जीर्ण-शीर्ण हो चुके हैं और 2,900 स्तंभों को मामूली मरम्मत की आवश्यकता है।
60 प्रतिशत काम अभी भी बाकी है। यह सहमति हुई है कि विषम संख्या वाले स्तंभों की मरम्मत नेपाल सरकार द्वारा और सम संख्या वाले स्तंभों की मरम्मत भारत सरकार द्वारा की जाएगी।
हालाँकि नेपाली पक्ष इस तंत्र की बैठक के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहा है, लेकिन भारतीय पक्ष सकारात्मक नहीं रहा है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की दिल्ली यात्रा की पुष्टि के साथ, भारत ने भी बीडब्ल्यूजी सहित द्विपक्षीय तंत्रों की बैठक के प्रति अपना सकारात्मक रुख दिखाया है। प्रधानमंत्री ओली ने पुष्टि की है कि वह 31 दिसंबर को दिल्ली आएंगे। हालाँकि, दोनों पक्षों द्वारा इस यात्रा की औपचारिक घोषणा अभी बाकी है।







