उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
15/09/2025
काठमाण्डौ,नेपाल – भारतीय सुरक्षा बलों ने सोमवार को एक शीर्ष कमांडर समेत तीन ‘नक्सली’ विद्रोहियों को मार गिराया। यह अभियान दशकों से चले आ रहे उग्रवाद को समाप्त करने के सरकारी प्रयासों का हिस्सा है।
माओवादी विचारधारा से प्रेरित ‘नक्सली’ उग्रवाद 1967 में हिमालय की तलहटी में स्थित नक्सलबाड़ी गाँव में शुरू हुआ था। तब से अब तक 12,000 से ज़्यादा विद्रोही, सुरक्षाकर्मी और नागरिक मारे जा चुके हैं।
ताज़ा मुठभेड़ सोमवार सुबह झारखंड राज्य में हुई। भारत के केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के अनुसार, इस अभियान को एक ‘महत्वपूर्ण सफलता’ के रूप में देखा जा रहा है।
सीआरपीएफ ने कहा कि मुठभेड़ में तीन ‘शीर्ष नक्सली कमांडर’ मारे गए। मारे गए लोगों में से एक सहदेव सोरेन था, जो नक्सली संगठन की केंद्रीय समिति का सदस्य था। उसकी गिरफ्तारी पर लगभग 113,000 डॉलर (₹94 लाख) का इनाम रखा गया था।
कुछ ही दिन पहले, सुरक्षा बलों ने ओडिशा और छत्तीसगढ़ की जंगली सीमा पर एक अन्य मुठभेड़ में एक अन्य नक्सली कमांडर समेत नौ विद्रोहियों को मार गिराया था।
भारत सरकार ने मार्च तक उग्रवाद को पूरी तरह से खत्म करने का संकल्प लिया है।
2000 के दशक के मध्य में, उग्रवाद ने देश के लगभग एक-तिहाई हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया था और अनुमानतः 15,000-20,000 उग्रवादी थे।
सरकार का कहना है कि पिछले साल से “लाल गलियारा” कहे जाने वाले इस इलाके में एक बड़े अभियान में 400 से ज़्यादा विद्रोही मारे गए हैं।
इस साल मई में, नक्सल नेता नंबाला केशव राव (उर्फ बसवराजू) 26 अन्य उग्रवादियों के साथ मारा गया था।
इस संघर्ष में सुरक्षा बलों को भी कई बार निशाना बनाया गया है। जनवरी में सड़क किनारे हुए एक बम विस्फोट में कम से कम नौ भारतीय सुरक्षाकर्मी मारे गए थे।







