उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
30/10/2025
काठमाण्डौ,नेपाल – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग गुरुवार को 6 साल बाद दक्षिण कोरिया में मिले।
दोनों नेताओं ने हाथ मिलाकर एक-दूसरे का अभिवादन किया और द्विपक्षीय वार्ता शुरू हुई। 2019 के बाद यह उनकी पहली आमने-सामने की मुलाकात है।
बातचीत की शुरुआत में, ट्रंप ने कहा, “मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि हमारी मुलाकात सफल होगी।”
उन्होंने आगे कहा, “शी एक सख्त वार्ताकार हैं, जो हमेशा आसान नहीं होता। लेकिन हम एक-दूसरे को अच्छी तरह जानते हैं।”
इस बैठक को दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार युद्ध को कम करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
सुत्र के अनुसार, आज की चर्चाओं में व्यापार समझौतों और शुल्कों के साथ-साथ ताइवान में चीनी सैन्य हस्तक्षेप और संयुक्त राज्य अमेरिका में अवैध फेंटेनाइल ड्रग तस्करी भी मुख्य एजेंडे में रहेंगे।
*शी जिनपिंग ने बैठक से पहले ट्रंप की प्रशंसा की*
बैठक से पहले, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ट्रंप के “शांति प्रयासों और युद्ध रोकने के प्रयासों” की प्रशंसा की।
उन्होंने कहा, “चीन और अमेरिका हमेशा हर बात पर सहमत नहीं हो सकते, लेकिन दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग ज़रूरी है।”
उनके अनुसार, दोनों देशों को “सही दिशा” में आगे बढ़ना चाहिए, जिससे चीन-अमेरिका संबंधों में दीर्घकालिक स्थिरता आ सके।
जिनपिंग ने आगे कहा, “चीन का विकास ट्रंप के अमेरिका को फिर से महान बनाने के दृष्टिकोण की दिशा में है।”
*ट्रंप चीन के साथ व्यापार समझौता चाहते हैं*
ट्रंप चीन के साथ एक नया व्यापार समझौता करना चाहते हैं। इसमें अमेरिकी सोयाबीन खरीदना और दुर्लभ मृदा खनिजों पर प्रतिबंध हटाना जैसे मुद्दे शामिल हैं।
अमेरिका ने फरवरी 2025 में चीन पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया था, जो अप्रैल तक बढ़कर 145 प्रतिशत हो गया। वर्तमान में, चीन से आने वाले सामानों पर 30 प्रतिशत टैरिफ लागू है।
यह वार्ता ट्रंप द्वारा 1 नवंबर से चीनी वस्तुओं पर 100 प्रतिशत टैरिफ और कड़े व्यापार नियम लागू करने की धमकी के संदर्भ में हो रही है। यह चेतावनी चीन द्वारा कुछ खनिजों और चुम्बकों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के बाद आई है।
ट्रंप रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने में भी चीन की मदद चाहते हैं। पिछले हफ़्ते उन्होंने दो प्रमुख रूसी तेल कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए, जिनका चीन ने विरोध किया था।
ट्रंप ने कहा, “मैं शी जिनपिंग से रूसी तेल खरीदने के बारे में भी बात करूँगा। चीन अभी रूस से बहुत कम तेल खरीद रहा है।”
ताइवान का मुद्दा भी बैठक का एक प्रमुख विषय होगा। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका ताइवान को हथियार मुहैया कराता है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है, “ताइवान को छोड़ना किसी व्यापार समझौते का हिस्सा नहीं होगा। ताइवान की चिंताएँ जायज़ हैं।”







