अमेरिका का प्रोजेक्ट फ़ायरवॉल क्या है?

 

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
21/09/2025

काठमाण्डौ,नेपाल – अमेरिकी सरकार ने शुक्रवार से ‘प्रोजेक्ट फ़ायरवॉल’ शुरू किया है। श्रम विभाग ने एच-1बी वीज़ा कार्यक्रम के दुरुपयोग को रोकने के लिए यह अभियान शुरू किया है। जिस दिन मंत्रालय ने प्रोजेक्ट फ़ायरवॉल शुरू किया, उसी दिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1बी वीज़ा शुल्क बढ़ाकर 1,00,000 डॉलर करने के एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए।

प्रोजेक्ट फ़ायरवॉल के ज़रिए, मानव संसाधन भर्ती करने वाली कंपनियों, खासकर तकनीकी क्षेत्र में, पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। विदेशी कर्मचारियों पर नकेल कस कर अमेरिकी कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने की कोशिश की जा रही है। यह परियोजना ट्रंप की ‘अमेरिका फ़र्स्ट’ नीति के अनुरूप लागू की गई है।

अमेरिका में, इसे नौकरी से बेदखल होने से बचाने के उपाय के रूप में पेश किया गया है। हालाँकि, विशेषज्ञों ने बताया है कि वीज़ा शुल्क में वृद्धि, कड़ी निगरानी और प्रवर्तन प्रावधान विदेशी कर्मचारियों को हतोत्साहित करेंगे और इससे अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए यह और महंगा हो जाएगा।

प्रोजेक्ट फ़ायरवॉल से भारतीयों के ख़ास तौर पर प्रभावित होने की बात कही जा रही है। ऐसे वीज़ा लेने वालों में लगभग तीन-चौथाई भारतीय हैं। दूसरे, बड़ी संख्या में चीनी लोगों ने ही वीज़ा लिया।

इसका मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि उच्च-कौशल वाले पदों पर अमेरिकी नागरिकों को प्राथमिकता दी जाए और वीज़ा पर विदेशी कर्मचारियों का दबदबा न हो। इस पहल के तहत, एच-1बी वीज़ा का दुरुपयोग करने वाली कंपनियों की कड़ी जाँच की जाएगी। अगर कोई कंपनी नियमों का उल्लंघन करती पाई जाती है, तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है और अन्य सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

अनुमान है कि इससे सिलिकॉन वैली की बड़ी कंपनियों और आईटी सेवा प्रदाताओं की लागत बढ़ सकती है और विशेषज्ञ इंजीनियरों और प्रोग्रामरों पर निर्भर महत्वपूर्ण परियोजनाओं में देरी हो सकती है। विश्लेषण किया गया है कि इस तरह के कठोर निर्णय से कुशल श्रमिकों की कमी और बढ़ सकती है, क्योंकि अमेरिकी विश्वविद्यालय अभी तक आवश्यक संख्या में कुशल श्रमिकों का उत्पादन नहीं कर रहे हैं।

विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि इस तरह के निर्णय से एआई, सेमीकंडक्टर और अत्याधुनिक तकनीक के विकास में अमेरिका के नवाचार और प्रतिस्पर्धात्मकता पर असर पड़ सकता है, जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रहा है।

इस अभियान के नाम में सूचना प्रौद्योगिकी शब्दावली ‘फ़ायरवॉल’ को शामिल करना सार्थक माना जा रहा है। आईटी क्षेत्र में, ‘फ़ायरवॉल’ एक सुरक्षा प्रणाली है जो कंप्यूटर नेटवर्क को हैकर्स, वायरस और अवांछित ट्रैफ़िक जैसे खतरों से बचाती है।

अमेरिकी सरकार ने अपने रोज़गार बाज़ार, और ख़ास तौर पर आईटी क्षेत्र को विदेशी कर्मचारियों से संभावित ‘जोखिमों’ से बचाने की मंशा ज़ाहिर की है।

भारतीय, जो अमेरिकी आईटी क्षेत्र में अपने योगदान को महत्वपूर्ण मानते हैं, कह रहे हैं कि मोदी सरकार को अमेरिकी नेतृत्व को इस बारे में स्पष्ट कर देना चाहिए। प्रमुख भारतीय आईटी कंपनियों ने इस कदम पर चिंता जताई है। उनके अनुसार, यह नीति भारतीय तकनीकी कर्मचारियों के अमेरिका में प्रवेश में बाधा उत्पन्न करेगी।

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की सख़्ती से भारतीय कंपनियों को अमेरिका से आगे यूरोप और अन्य देशों में अपना कारोबार बढ़ाने का मौका मिलेगा, जिससे वैश्विक अवसर बढ़ेंगे। विशेषज्ञों ने मोदी की इस टिप्पणी की आलोचना की है कि इससे भारत में प्रतिभा पलायन रुकेगा।

Please Share this News
  • Ramchandra Rawat

    चीप एडिटर - इंडिया न्यूज़ जक्शन

    सम्बंधित ख़बर

    पत्रकार सत्यम मिश्रा के हमलावरों की तत्काल हो गिरफ्तारी – सेराज अहमद कुरैशी

      गोंडा, उत्तर प्रदेश। इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन ® के राष्ट्रीय अध्यक्ष सेराज अहमद कुरैशी ने पत्रकार सत्यम मिश्रा पर हुए हमले की कड़ी शब्दों निंदा करते हुए कहा कि पत्रकारों…

    Please Share this News

    सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन सीजन-2 की विजेता बनीं नगमा खातून, जीता फ्री उमराह पैकेज व ट्राफी

      सीरतुन्नबी, कुरआन और साइंस के तालमेल पर हुआ विशेष व्याख्यान। कलमा शरीफ पढ़ने की मुहिम भी शुरू, दो करोड़ 39 लाख 58 हजार 838 दुरूद शरीफ पेश की। सेराज…

    Please Share this News

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *