उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
30/10/2025
काठमाण्डौ,नेपाल – बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवात मोन्था के प्रभाव से नेपाल में भी बारिश और बर्फबारी हो रही है।
पूर्वी तराई और मधेश प्रांत के ज़िलों में इसके प्रभाव के और बढ़ने और ज़्यादा नुकसान पहुँचाने की आशंका है। इसलिए, मधेश प्रांत सरकार ने कहा है कि उसने सुरक्षा तंत्र और बचावकर्मियों को अलर्ट पर रखा है।
आज से ग्यारह साल पहले, 2014 में, कार्तिक माह में ‘हुदहुद’ नामक चक्रवात भी आया था। इसके प्रभाव से नेपाल के ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी के कारण लगभग 40 लोगों की मौत हो गई थी।
अब, मोन्था नामक एक और चक्रवात के नेपाल में तबाही मचाने की आशंका है।
इसलिए, मौसम विज्ञानियों ने इसके नुकसान से बचने के लिए पर्वतारोहण न करने और बाढ़ व जलप्लावन प्रभावित क्षेत्रों में हाई अलर्ट पर रहने की सलाह दी है।
*चक्रवात क्या है?*
चक्रवात एक विशाल वायु मंडल होता है जो निम्न दाब क्षेत्र के केंद्र से सभी दिशाओं में घूमता है।
चक्रवात की मुख्य विशेषता चक्रवात की तरह घूमने वाली हवा की गति है, जो उत्तरी गोलार्ध में वामावर्त और दक्षिणी गोलार्ध में दक्षिणावर्त घूमती है।
इससे तूफ़ान तेज़ गति से चलता है और तूफ़ान द्वारा लाए गए बादल बारिश का कारण बनते हैं। समुद्र से ज़मीन पर आने के बाद, तूफ़ान की शक्ति भी कम हो जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, चक्रवातों का नामकरण उनकी पहचान और लोगों को जागरूक करने के लिए किया जाता है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन द्वारा चक्रवातों के लिए निर्धारित विशिष्ट विधि, प्रक्रिया और मानकों के अनुसार भी इनका नामकरण किया जाता है।
*’मोंथा’ नाम कैसे रखा गया? इसका नामकरण किसने किया?*
उत्तरी हिंद महासागर क्षेत्र में आने वाले चक्रवातों के नाम वहाँ के देशों द्वारा पहले से तैयार की गई सूची में से चुने जाते हैं। ‘मोंथा’ नाम थाईलैंड द्वारा सुझाया गया था। थाईलैंड उन 13 सदस्य देशों में से एक है जो उत्तरी हिंद महासागर क्षेत्र में चक्रवातों के नाम सुझाते हैं।
*मोंथा का क्या अर्थ है?*
थाई भाषा में, ‘मोंथा’ का अर्थ सुगंधित या सुंदर फूल होता है।
*चक्रवातों का नामकरण कैसे किया जाता है? नामकरण परंपरा कब शुरू हुई?*
नामकरण की परंपरा 2000 में विश्व मौसम विज्ञान संगठन के एशिया और प्रशांत क्षेत्र के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक आयोग द्वारा शुरू की गई थी।
उस समय, इस समूह में बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल थे। बाद में, इस समूह का विस्तार हुआ। और, 2018 में, इसमें पाँच और देश शामिल हो गए: ईरान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और यमन।
ये देश बारी-बारी से चक्रवात का नामकरण करते हैं। प्रत्येक देश 13 नामों की एक सूची प्रस्तुत करता है। इन सभी को मिलाकर 169 नाम बनते हैं। जब कोई नया चक्रवात बनता है, तो उस सूची में से एक नया नाम चुना जाता है।
तदनुसार, थाईलैंड के प्रस्ताव के अनुसार ‘मोंथा’ चक्रवात का नामकरण किया गया।
*चक्रवात का नामकरण करने से क्या होता है?*
ऐसा माना जाता है कि इस तरह से चक्रवात का नामकरण करने से तूफान से प्रभावित देशों के बीच जागरूकता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा। यह भी कहा जाता है कि इससे सूचना विनिमय प्रणाली मजबूत होगी।
*नेपाल को इसका नामकरण करने की अनुमति क्यों नहीं है?*
नेपाल विश्व मौसम विज्ञान संगठन का भी सदस्य है। लेकिन नेपाल को चक्रवातों का नाम रखने का अवसर नहीं मिलता। क्योंकि नेपाल के पास महासागर नहीं है। चूँकि वह चक्रवातों से सीधे प्रभावित नहीं होता, इसलिए नेपाल उनका नाम नहीं रखता।







