उत्तर प्रदेश में जातिगत जनसंख्या और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के बीच बड़ा अंतर

आँकड़ों के विश्लेषण से सामने आई सवर्णों की अधिक भागीदारी, OBC व मुस्लिम समाज का कम प्रतिनिधित्व

लखनऊ।
उत्तर प्रदेश की जातिगत जनसंख्या और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर किए गए एक विश्लेषण में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अनुमानित जनसंख्या आँकड़ों की तुलना जब लोकसभा और विधानसभा में चुने गए जनप्रतिनिधियों से की गई, तो यह स्पष्ट हुआ कि कई बड़े सामाजिक वर्गों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है।
जातिगत जनसंख्या का अनुमान
अनुमान के अनुसार उत्तर प्रदेश की कुल आबादी में लगभग 45–50 प्रतिशत OBC, 20–21 प्रतिशत अनुसूचित जाति (SC), 18–19 प्रतिशत मुस्लिम, जबकि सवर्ण समाज की जनसंख्या लगभग 17–20 प्रतिशत मानी जाती है। अनुसूचित जनजाति (ST) की संख्या एक प्रतिशत से भी कम है।
लोकसभा में प्रतिनिधित्व (2024)
80 लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में:
OBC वर्ग के लगभग 34 सांसद (42.5%)
SC वर्ग के 18 सांसद (22.5%)
सवर्ण वर्ग के 23 सांसद (28.8%)
मुस्लिम समुदाय के केवल 5 सांसद (6.2%)
जनसंख्या के अनुपात से तुलना करने पर यह सामने आया कि मुस्लिम समुदाय को जहाँ लगभग 15 सीटें मिलनी चाहिए थीं, वहाँ केवल 5 सीटों पर ही प्रतिनिधित्व मिला। वहीं सवर्ण वर्ग को अपेक्षा से अधिक सीटें प्राप्त हुईं।
विधानसभा में स्थिति (403 सीटें)
विधानसभा के आँकड़े और भी स्पष्ट तस्वीर दिखाते हैं:
सवर्ण समाज: लगभग 151 विधायक (37%)
OBC वर्ग: लगभग 142 विधायक (35%)
SC वर्ग: लगभग 83 विधायक (20.5%)
मुस्लिम समुदाय: लगभग 31 विधायक (7.5%)
ST: 2 विधायक
जबकि जनसंख्या के आधार पर सवर्ण समाज को लगभग 73 सीटें मिलनी चाहिए थीं, वास्तविक संख्या इससे दोगुनी से अधिक पाई गई। इसके विपरीत OBC और मुस्लिम समाज को अपेक्षा से कहीं कम प्रतिनिधित्व मिला।
मुख्य निष्कर्ष
सवर्ण समाज को जनसंख्या की तुलना में लगभग दोगुना प्रतिनिधित्व
OBC वर्ग को उनकी आबादी के अनुपात में कम राजनीतिक भागीदारी
SC वर्ग का प्रतिनिधित्व लगभग संतुलित
मुस्लिम समुदाय को लोकसभा और विधानसभा—दोनों में सबसे कम प्रतिनिधित्व
राजनीतिक और सामाजिक संकेत
विश्लेषण से यह संकेत मिलता है कि उत्तर प्रदेश की सत्ता संरचना अब भी काफी हद तक सवर्ण-प्रधान बनी हुई है। OBC और SC मिलकर भी अपनी जनसंख्या के अनुरूप राजनीतिक शक्ति नहीं बना सके हैं, जबकि मुस्लिम समाज की राजनीतिक उपस्थिति सबसे कमजोर स्थिति में है।
समाज के लिए संदेश
इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए महेश चौरसिया ने कहा कि जातिगत मतभेद बढ़ाने के बजाय सामाजिक समझ और संतुलन आवश्यक है। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष माननीय पंकज चौधरी जी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि प्रतिनिधित्व और जातिगत जनगणना पर स्वस्थ चर्चा लोकतंत्र को मजबूत करती है।

Please Share this News
  • Ramchandra Rawat

    चीप एडिटर - इंडिया न्यूज़ जक्शन

    सम्बंधित ख़बर

    पत्रकार सत्यम मिश्रा के हमलावरों की तत्काल हो गिरफ्तारी – सेराज अहमद कुरैशी

      गोंडा, उत्तर प्रदेश। इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन ® के राष्ट्रीय अध्यक्ष सेराज अहमद कुरैशी ने पत्रकार सत्यम मिश्रा पर हुए हमले की कड़ी शब्दों निंदा करते हुए कहा कि पत्रकारों…

    Please Share this News

    सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन सीजन-2 की विजेता बनीं नगमा खातून, जीता फ्री उमराह पैकेज व ट्राफी

      सीरतुन्नबी, कुरआन और साइंस के तालमेल पर हुआ विशेष व्याख्यान। कलमा शरीफ पढ़ने की मुहिम भी शुरू, दो करोड़ 39 लाख 58 हजार 838 दुरूद शरीफ पेश की। सेराज…

    Please Share this News

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *