उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
08/09/2025
काठमाण्डौ,नेपाल – मानवाधिकार संगठनों ने जनरल-जी के प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा अंधाधुंध बल प्रयोग की कड़ी निंदा की है।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की नेटवर्क जवाबदेही निगरानी समिति ने संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री और गृह मंत्री के तत्काल इस्तीफे की मांग की है।
समिति ने घटना की स्वतंत्र जाँच और जनरल-जी की मांगों पर तत्काल ध्यान देने की भी पुरज़ोर माँग की है।
समिति ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ जनरल-जी के प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा अत्यधिक, अंधाधुंध और अनुपातहीन बल प्रयोग के कारण एक दर्जन से ज़्यादा प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई।
निगरानी समूह का मानना है कि यह घटना सोशल मीडिया के अचानक बंद होने, युवा पीढ़ी पर इसके सामाजिक, आर्थिक, मनोवैज्ञानिक और शैक्षिक पहलुओं पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को पूरी तरह नज़रअंदाज़ करने और व्यापक विरोध के बावजूद इस पर पुनर्विचार करने को तैयार न होने के कारण हुई, और इसके विपरीत, प्रधानमंत्री और मंत्रियों के अड़ियल बयान लगातार सार्वजनिक होते रहे।
बयान में कहा गया है, “सरकार द्वारा पूर्व घोषित आंदोलन को व्यवस्थित और शांतिपूर्ण बनाने में पूरी तरह से सावधानी, तत्परता और सतर्कता बरतने में पूरी तरह विफल रहने के कारण यह अत्यंत दुखद और दर्दनाक घटना घटी है।
हम मांग करते हैं कि अलोकतांत्रिक और मानवाधिकार-विरोधी हठधर्मिता का त्याग करने वाली जेनजी पीढ़ी की जायज़ मांगों पर तुरंत ध्यान दिया जाए, घायलों को उचित उपचार प्रदान किया जाए और मृतकों के परिवारों को उचित राहत और मुआवज़ा दिया जाए।”
उन्होंने इस निंदनीय घटना की स्वतंत्र जाँच की भी माँग की है, जिसने बल प्रयोग के स्थापित मूल्यों का उल्लंघन करके और ज़िम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लाकर नागरिकों के जीवन को भयानक क्षति पहुँचाई है।
“समिति ने खेद व्यक्त किया है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भी अपनी संवैधानिक ज़िम्मेदारी निभाने में विफल रहा है, और वह भी उस संवेदनशील और गंभीर स्थिति में, जहाँ युवा पीढ़ी पूर्व घोषणा के बाद सड़कों पर उतर आई है, निगरानी के माध्यम से मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकने के लिए हमेशा प्रयास करता रहा है।”
जवाबदेही निगरानी समिति की ओर से मानवाधिकार कार्यकर्ता राजूप्रसाद चापागाई (समन्वयक), रुक्मणी महर्जन, चरण प्रसाई, डॉ. गौरीशंकरलाल दास, डॉ. मंदिरा शर्मा, दिनेश त्रिपाठी, सुमन अधिकारी, देवी सुनुवार, बाबूराम गिरी, डॉ. बीरेंद्र थपलिया, ओमप्रकाश आर्यल व अन्य ने एक संयुक्त बयान जारी कर यह मांग की.







