उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
06/09/2025
काठमाण्डौ,नेपाल — संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की सूची में शामिल न होने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म धीरे-धीरे बंद हो रहे हैं।
इंटरनेट सेवा प्रदाताओं ने गुरुवार रात से ऐसे प्लेटफॉर्म के वेब एड्रेस (URL) ब्लॉक करना शुरू कर दिया है।
सेवा प्रदाताओं के अनुसार, फेसबुक, यूट्यूब और लिंक्डइन जैसे प्लेटफॉर्म के ‘URL’ ब्लॉक कर दिए गए हैं। सरकार द्वारा गैर-सूचीबद्ध सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को बंद करने के फैसले के बाद, ट्विटर (X) ने एक ईमेल भेजकर कहा है कि वह नेपाल में पंजीकृत होना चाहता है।
X ने शुक्रवार को ही मंत्रालय को एक आधिकारिक ईमेल लिखकर सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया के बारे में पूछा था।
संचार मंत्रालय के प्रवक्ता गजेंद्र कुमार ठाकुर ने कहा, “हालांकि X ने पूछताछ की है, लेकिन उसने नेपाल में पंजीकरण के लिए कोई आधिकारिक आवेदन प्रस्तुत नहीं किया है।”
दूसरी ओर, मेटा ने गुरुवार को मंत्रालय के अधिकारियों से सोशल मीडिया पंजीकरण प्रक्रिया के बारे में अनौपचारिक रूप से पूछताछ की थी, लेकिन एक अधिकारी ने कहा कि कोई आधिकारिक आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है।
नवंबर 2001 में सोशल मीडिया दिशानिर्देश जारी करने के बाद से, सरकार ने पाँच बार नोटिस जारी करके प्लेटफ़ॉर्म को सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया है। पिछली बार, सरकार ने बुधवार को सात दिन की समय सीमा समाप्त होने के बाद गैर-सूचीबद्ध प्लेटफ़ॉर्म को बंद करने का कदम उठाया था।
जैसे ही सरकार सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के फैसले के कार्यान्वयन की प्रक्रिया में आगे बढ़ी, कुछ कानूनी पेशेवरों और अधिकार कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को इसके खिलाफ एक रिट याचिका के साथ सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
सर्वोच्च न्यायालय के सूचना अधिकारी नीराजन पांडे ने कहा कि रिट याचिका के पंजीकरण और प्रक्रिया पर रविवार को फैसला लिया जाएगा।
इंटरनेट सेवा प्रदाताओं के एक प्रमुख संगठन, ISPAN ने नियामक दूरसंचार प्राधिकरण को पत्र लिखकर ऐसी विशेष परिस्थितियों के लिए तरीके और प्रक्रियाएँ निर्धारित करने का आग्रह किया है।
पत्र में कहा गया है, “चूँकि उपभोक्ता प्रतिबंध से बचने के लिए वीपीएन और अन्य साधनों का उपयोग करते हैं, इसलिए सूचना और संचार मंत्रालय के लिए ‘सामग्री फ़िल्टरिंग’ की कानूनी और तकनीकी जटिलताओं को हल करना अनिवार्य है।”
“टिकटॉक प्रतिबंध के अनुभव को देखते हुए, हम अनुरोध करते हैं कि मोबाइल और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं की एक टास्क फोर्स गठित की जाए जो सोशल मीडिया को निष्क्रिय करने के लिए उपयुक्त तरीके सुझाए।”
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने तर्क दिया है कि सरकार के इस कदम से नागरिकों के संचार और सूचना के अधिकार पर गंभीर रूप से असर पड़ा है और सोशल मीडिया को बंद करने के फैसले को लोगों के अधिकारों पर सीधा हमला बताया है।
आरएसएस ने मांग की है कि सोशल मीडिया को बंद करने के फैसले को तुरंत वापस लिया जाए, दुरुपयोग को रोकने के लिए नीति-आधारित तकनीकी और कानूनी उपाय अपनाए जाएँ और भविष्य में नागरिक अधिकारों को कम करने के लिए कोई कदम न उठाया जाए।
सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों और सत्तारूढ़ दल के कुछ नेताओं ने गैर-सूचीबद्ध सोशल मीडिया को निष्क्रिय करने के कदम का बचाव किया है।







