दिल्ली की ठंडी सुबह थी। सूरज की पहली किरणें आसमान में फैल रही थीं, और शहर की हलचल धीरे-धीरे शुरू हो रही थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक विशेष कार्यक्रम के तहत बच्चों के अस्पताल का दौरा करने जा रहे थे। उनकी मंशा थी कि वह बच्चों से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाएं और उनके स्वास्थ्य के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाएं।
जैसे ही मोदी जी अस्पताल पहुंचे, वहां बच्चों की मुस्कान और उनके मासूम चेहरों ने उन्हें उत्साहित कर दिया। उन्होंने बच्चों से बात की, उन्हें आशीर्वाद दिया और उनकी छोटी-छोटी समस्याओं को सुना। लेकिन तभी उनकी नजर एक कोने में खड़े एक दुबले-पतले 10 साल के बच्चे पर पड़ी। वह बच्चा बाकी बच्चों की तरह दौड़कर मोदी जी के पास नहीं आया। बस खामोश खड़ा था, उसकी आंखों में एक गहरी समझ थी, जैसे वह किसी रहस्य को छुपाए हुए हो।
मोदी जी उस बच्चे के पास गए और मुस्कुराते हुए पूछा, “क्या नाम है बेटा?” बच्चे ने धीमी आवाज में कहा, “आरव।” मोदी जी ने फिर पूछा, “आरव, तुम बाकी बच्चों के साथ मिलने क्यों नहीं आए?” आरव ने सीधा मोदी जी की आंखों में देखा और कहा, “मेरे पास सिर्फ मिलने का समय नहीं है। मेरे पास आपको बताने के लिए एक बहुत बड़ी बात है।”







